सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नए कानून के तहत चुनाव आयुक्त (Election Commissioner) की नियुक्ति के लिए प्रधान मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ किसी कैबिनेट मंत्री को चयन पैनल का हिस्सा बनाने पर सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा है कि एक कैबिनेट मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ जा ही नहीं जा सकता है। ऐसे में सभी नियुक्तियों पर फैसला जाहिर तौर पर दो तिहाई के बहुमत से ही होगा।
“चयन के फैसले में केंद्र सरकार के पास वीटो क्यों?”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चयन समिति की संरचना पर गंभीर चिंता जताई। बेंच ने पूछा कि नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका को प्रभावी वीटो जैसी स्थिति क्यों दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें जो बात परेशान करती है, वह यह है कि कार्यपालिका के पास वीटो जैसी शक्ति क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी से इशारा किया कि प्रधानमंत्री और एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के चयन समिति में होने से निर्णय प्रक्रिया पहले से तय बहुमत की ओर झुक सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों की नियुक्ति में संतुलन और निष्पक्ष होना जरूरी है।
स्वतंत्र चयन पैनल का दिखावा करने की जरूरत क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की जब देश के चीफ जस्टिस सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया यानी चयन प्रक्रिया में शामिल होते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी एक स्वतंत्र प्रक्रिया क्यों नहीं हो सकती है? क्योंकि यह भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी सवाल उठाया कि जब चयन प्रक्रिया का अंतिम परिणाम पहले से ही बहुमत आधारित प्रतीत होता है, तो फिर स्वतंत्र पैनल का दिखावा करने की आवश्यकता ही क्या है? न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि किसी भी संवैधानिक संस्था की नियुक्ति प्रक्रिया में वास्तविक स्वतंत्रता और संतुलन होना आवश्यक है, न कि केवल औपचारिक रूप से।
संवैधानिकता तय करना सुप्रीम कोर्ट का काम
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि संसद को कानून बनाने का अधिकार जरूर है, लेकिन संविधान की अंतिम व्याख्या का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही रहेगा। कोर्ट ने टिप्पणी कि, “संसद के पास कानून बनाने की शक्ति है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अंतिम निर्णायक है। कानूनों की व्याख्या करने का अधिकार उसके पास रहेगा, चाहे यह किसी को पसंद हो या नहीं।”
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर क्यों हो रही सुनवाई?
केंद्र सरकार के नए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाई गई चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम व्यवस्था में चीफ जस्टिस को भी समिति का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया था। अब इसी बदलाव को चुनौती देते हुए दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।
