भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को लंबित एसिड अटैक मामलों से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। गुरुवार को एसिड अटैक एक मामले पर सुनवाई करते हुए सभी हाई कोर्ट से देश में एसिड अटैक के सभी पेंडिंग ट्रायल की डिटेल्स देने को कहा है।
दरअसल, पानीपत की शाहीन मलिक पर एसिड अटैक हुआ था। इस अटैक में उसकी आखें चली गई, लेकिन उनके हमलावर आज भी खुले घूम रहे हैं। 16 साल पहले हुआ हमला आज भी अदालत में 'अधूरी कहानी' बनकर लटका हुआ है।
महिलाओं को पिलाया जा रहा एसिड
सुप्रीम कोर्ट में जब शाहीन मलिक की याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, तो खुद मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत भी दंग रह गए। उन्हें यह सुनकर गहरा धक्का लगा कि देश में नई तरह की हिंसा सामने आ रही है, जहां महिलाओं को एसिड पिलाया जा रहा है। यह दर्द न शरीर पर दिखता है, न कानून इसे “एसिड अटैक” मानता है।
शाहीन ने कोर्ट को बताया कि ऐसी घटनाएं पिछले पांच सालों में बढ़ी हैं, ज्यादातर घरेलू हिंसा के मामले, जहां आरोपी पति ही होते हैं। इन महिलाओं की फूड पाइप जल जाती है, महीनों अस्पताल में रहना पड़ता है, लेकिन उन्हें विकलांगता का दर्जा नहीं मिलता, क्योंकि घाव “दिखते नहीं”। कानून सिर्फ फेंके गए एसिड को हमला मानता है। पिलाए गए एसिड को नहीं।
सीजेआई ने मामले पर जताई हैरानी
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा,"मैंने कभी नहीं सुना कि किसी को एसिड पिलाया गया हो।” शाहीन से बातचीत के दौरान सीजेआई ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा,“यह कितना दर्दनाक होगा और कितना अमानवीय है।”
लेकिन असली झटका उन्हें तब लगा जब पता चला कि शाहीन के साथ 2009 में हुए एसिड अटैक का ट्रायल आज भी दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में अधर में लटका है। इस मामलें पर सीजेआई ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, कानूनी सिस्टम का मज़ाक बना रखा है! यह शर्मनाक है!”
पूरे देश से रिपोर्ट तलब
CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए देशभर में एसिड अटैक मामलों की स्थिति पर सख्त निर्देश जारी किए। सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से सभी लंबित एसिड अटैक मामलों की रिपोर्ट मांगी गई
वहीं, हर केस की स्टेज, देरी का कारण और अब तक की प्रोग्रेस सुप्रीम कोर्ट को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस देते हुए पूछा कि एसिड पिलाए गए पीड़ितों को विकलांगता का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता?
CJI ने साफ कहा,“ऐसे मामलों में देरी अस्वीकार्य है। त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाए।”कोर्ट ने कहा कि चार हफ्ते बाद इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।"
