मेट्रो प्रणाली का बन सकती है विकल्प
गडकरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- सफल संचालन के बाद यह अत्यधिक लागत वाली मेट्रो प्रणालियों के लिए एक बहुत ही लागत प्रभावी विकल्प बन सकता है, विशेष रूप से बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) खंडों पर जहां मेट्रो रेल के समान इस बस के लिए बनी लाइनें सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे को बढ़ाएंगी। सूत्रों ने कहा कि गडकरी ने नवनिर्मित एक्सप्रेसवे के सोहना-जयपुर कॉरिडोर पर ऐसी बसें चलाने की योजना पर विचार-विमर्श किया है। उन्होंने कहा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए नियमित अंतराल पर सब-स्टेशन लगाने और ऐसी बसों के संचालन के लिए अन्य तकनीकी जरूरतों जैसे मुद्दों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चूंकि ओवरहेड बिजली की आपूर्ति एक्सप्रेसवे पर विशिष्ट लेन के लिए होगी, इसलिए ऐसी दो ट्रॉली बसों के बीच कुछ अंतर बनाए रखना होगा।
बीओटी मॉडल पर होगी शुरुआत
गडकरी ने पिछले सप्ताह कहा था कि इलेक्ट्रिक ट्रॉली बसों में बिजनेस क्लास की सीटें होंगी और यह दूरी ढाई घंटे से भी कम समय में तय होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इसे बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर लाने की योजना बना रही है जिसमें निजी कंपनी पैसा लगाएंगी और किराए से कमाई करेंगी। गडकरी ने कहा कि उन्हें परियोजना की व्यवहार्यता पर भरोसा है क्योंकि लिथियम-आयन बैटरी वाली एक इलेक्ट्रिक बस की लागत लगभग 1.1 करोड़ रुपये है, जबकि हर इलेक्ट्रिक ट्रॉली बस की लागत लगभग 80 लाख रुपये होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इन बसों को चलाने के लिए बिजली शुल्क को कम करने का भी प्रयास करेगी।
