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सोहना-जयपुर के बीच पहले Electric Highway पर चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें, नितिन गडकरी ने बताया प्लान

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Oct 4, 2023, 02:22 PM IST

गडकरी ने पिछले सप्ताह कहा था कि इलेक्ट्रिक ट्रॉली बसों में बिजनेस क्लास की सीटें होंगी और यह दूरी ढाई घंटे से भी कम समय में तय होगी।

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नितिन गडकरी ने की इलेक्ट्रिक बस की सवारी (Image: Twitter@nitin_gadkari)

Sohna-Jaipur Electric Highway: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सोहना और जयपुर के बीच प्रस्तावित पहला इलेक्ट्रिक हाईवे पर काम तेजी से चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में यह केवल बसों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 24-मीटर लंबी इलेक्ट्रिक ट्रॉली बस में लगभग 180 यात्री बैठेंगे और इन्हें 10-15 मिनट के अंतराल पर चलाया जा सकता है। बाद में कमर्शियल ट्रकों को भी अनुमति दी जाएगी। हाल ही में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मीडियाकर्मियों के साथ यह जानकारी साझा की थी। मंगलवार को उन्होंने प्राग में ऑटोमोबाइल कंपनी स्कोडा द्वारा विकसित दुनिया की सबसे लंबी इलेक्ट्रिक ट्रॉली बस में परीक्षण सवारी की।

मेट्रो प्रणाली का बन सकती है विकल्प

गडकरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- सफल संचालन के बाद यह अत्यधिक लागत वाली मेट्रो प्रणालियों के लिए एक बहुत ही लागत प्रभावी विकल्प बन सकता है, विशेष रूप से बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) खंडों पर जहां मेट्रो रेल के समान इस बस के लिए बनी लाइनें सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे को बढ़ाएंगी। सूत्रों ने कहा कि गडकरी ने नवनिर्मित एक्सप्रेसवे के सोहना-जयपुर कॉरिडोर पर ऐसी बसें चलाने की योजना पर विचार-विमर्श किया है। उन्होंने कहा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए नियमित अंतराल पर सब-स्टेशन लगाने और ऐसी बसों के संचालन के लिए अन्य तकनीकी जरूरतों जैसे मुद्दों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चूंकि ओवरहेड बिजली की आपूर्ति एक्सप्रेसवे पर विशिष्ट लेन के लिए होगी, इसलिए ऐसी दो ट्रॉली बसों के बीच कुछ अंतर बनाए रखना होगा।

बीओटी मॉडल पर होगी शुरुआत

गडकरी ने पिछले सप्ताह कहा था कि इलेक्ट्रिक ट्रॉली बसों में बिजनेस क्लास की सीटें होंगी और यह दूरी ढाई घंटे से भी कम समय में तय होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इसे बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर लाने की योजना बना रही है जिसमें निजी कंपनी पैसा लगाएंगी और किराए से कमाई करेंगी। गडकरी ने कहा कि उन्हें परियोजना की व्यवहार्यता पर भरोसा है क्योंकि लिथियम-आयन बैटरी वाली एक इलेक्ट्रिक बस की लागत लगभग 1.1 करोड़ रुपये है, जबकि हर इलेक्ट्रिक ट्रॉली बस की लागत लगभग 80 लाख रुपये होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इन बसों को चलाने के लिए बिजली शुल्क को कम करने का भी प्रयास करेगी।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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