तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में सिगाची इंडस्ट्रीज के दवा संयंत्र में इस साल जून में हुए विस्फोट के सिलसिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में कंपनी के सीईओ अमित राज सिन्हा को गिरफ्तार किया गया है। छह महीने पहले हुए इस विस्फोट में 54 लोगों की मौत हो गयी थी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के मामले में आरोपी नंबर दो के रूप में नामजद सिगाची इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित राज सिन्हा को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। अमित राज सिन्हा को गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी बनाया है। मृतक मजदूरों के परिवारों की शिकायतों के आधार पर दर्ज केस में उन्हें आरोपी नंबर दो बनाया गया है। उन्होंने बताया कि छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है,ये सभी दवा कंपनी से जुड़े हैं।
हादसे को हो गए छह महीने
यह विस्फोट 30 जून को भानूर स्थित सिगाची इंडस्ट्रीज की फैक्ट्री में हुआ था।विनिर्माण संयंत्र में हुए विस्फोट और आग लगने की घटना में 54 लोगों की जान चली गयी और कई अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद पुलिस ने कंपनी प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।
जांच में मिलीं गंभीर खामियां
संगारेड्डी जिले की पाटनचेरु पुलिस की गहन जांच में फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों और निगरानी व्यवस्था में बड़ी कमियां सामने आईं। विस्फोट की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया,जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ। इसी आधार पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
हाईकोर्ट के दबाव में तेज हुई कार्रवाई
बता दें कि तेलंगाना हाईकोर्ट इस मामले की लगातार निगरानी कर रहा है। रिटायर्ड वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस हादसे को लेकर जनहित याचिका दायर की थी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। कई सुनवाइयों के दौरान हाईकोर्ट ने जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी। साथ ही सवाल किया था कि सबूत और गवाहों के बयान होने के बावजूद इतने महीनों तक कोई गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। साथ ही अदालत ने यह भी पूछा था कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है।
विशेषज्ञ समिति ने प्रबंधन को ठहराया गया था जिम्मेदार
वहीं, इस मामले में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने यह निष्कर्ष दिया था कि विस्फोट सिगाची इंडस्ट्रीज के प्रबंधन की लापरवाही के कारण हुआ था। इस रिपोर्ट से कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ मामला और मजबूत हो गया।
पीड़ित परिवारों को अब भी मुआवजे का इंतजार
इस हादसे में बिहार,ओडिशा,उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के 54 मजदूरों की मौत हुई थी। पीड़ित परिवारों को अब भी पूरे मुआवजे का इंतजार है। राज्य सरकार और कंपनी ने हर मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया था,लेकिन अब तक करीब 75 प्रतिशत राशि जारी नहीं की गई है।
