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शरद पवार ने भाजपा पर बोला हमला, कहा- सत्ता में आने के बाद भाजपा किसी नेता को ईडी का सामना नहीं करना पड़ा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 11, 2024, 09:05 PM IST

Sharad Pawar: शरद पवार ने दावा किया कि जब कोई सत्तारूढ़ भाजपा का विरोध करता है तो सत्ता का दुरुपयोग स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया, ईडी ने देश भर में जांच की है, जिसमें 2005 से 2023 तक 6,000 मामले दर्ज किए गए हैं।

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शरद पवार

Photo : BCCL

Sharad Pawar: वरिष्ठ नेता शरद पवार ने रविवार को दावा किया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से पार्टी के किसी भी नेता को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा है। बता दें, निर्वाचन आयोग द्वारा हाल में उनके भतीजे अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के रूप में मान्यता देने और पार्टी का चुनाव चिह्न घड़ी आवंटित करने पर शरद पवार ने कहा कि देश में ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी गई है और लोग ऐसे फैसले का समर्थन नहीं करेंगे। आयोग ने शरद पवार के नेतृत्व वाले समूह के लिए पार्टी का नाम ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार’ आवंटित किया है।

शरद पवार ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दावा किया कि जब कोई सत्तारूढ़ भाजपा का विरोध करता है तो सत्ता का दुरुपयोग स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया, ईडी ने देश भर में जांच की है, जिसमें 2005 से 2023 तक 6,000 मामले दर्ज किए गए हैं। लेकिन, 25 मामलों में पर्याप्त निष्कर्ष प्राप्त हुए और (जिनमें से) 85 प्रतिशत मामले विपक्ष के नेताओं से जुड़े थे। पवार ने उनकी पार्टी द्वारा आयोजित आरोग्य दूत अभियान में दावा किया, जब से भाजपा (2014 से) सत्ता में है, इस पार्टी के किसी भी नेता को ईडी की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा है। इसके अलावा, पार्टी के सत्ता में आने के बाद भाजपा नेताओं के खिलाफ जांच रोक दी गई।

निर्वाचन आयोग का फैसला आश्चर्यजनक

बाद में, जब एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों ने उनसे राकांपा के नाम और चुनाव चिह्न पर निर्वाचन आयोग के फैसले के बारे में पूछा, तो राज्यसभा सदस्य ने कहा कि उन्होंने अपना पहला चुनाव बैलों की जोड़ी के चुनाव चिह्न पर लड़ा था। उन्होंने कहा कि विचार और विचारधारा किसी भी चिह्न से अधिक महत्वपूर्ण हैं। पवार ने कहा, निर्वाचन आयोग का फैसला आश्चर्यजनक है। हमारी राजनीतिक पार्टी दूसरे लोगों को दे दी गई, ऐसी स्थिति देश में कभी नहीं देखी गई। मेरा मानना है कि लोग इस तरह के फैसले का समर्थन नहीं करेंगे। हम सोमवार को नये नाम और चुनाव चिह्न पर चर्चा करेंगे। पत्रकार निखिल वागले पर हमले के बारे में पूछे जाने पर शरद पवार ने कहा कि पुणे में एक व्यक्ति पर हमला किया गया और एक कार में तोड़फोड़ की गई, यह चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और राज्य तथा केंद्र को इस पर ध्यान देना चाहिए। बारामती लोकसभा क्षेत्र से जुड़े एक सवाल के जवाब में शरद पवार ने कहा, मैं आगामी चुनाव नहीं लड़ने जा रहा हूं। बारामती के लोग सीधे और सरल हैं। वे सही निर्णय लेंगे। पुणे जिले का बारामती पवार का राजनीतिक गढ़ है। नागरिकता संशाधन कानून (सीएए) के बारे में पूछे जाने पर शरद पवार ने कहा, सीएए लागू करना सही नहीं है। देखते हैं अगले हफ्ते क्या होता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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