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अपनी ही कहानी की विलेन बनी Seema Haider, वो 3 सवाल जिनमें उलझी...

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 31, 2023, 08:00 AM IST

Seema Haider Case: सीमा हैदर मामले में जांच एजेंसियां कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। इसीलिए सीमा लगातार खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं, और उनके एक-एक दस्तावेज की बारीकी से जांच भी की जा रही है। तीन सवालों पर खुफिया अधिकारियों की सुई बार-बार अटक रही है। आइए जानते हैं...

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सीमा हैदर केस

Seema Haider Case: पाकिस्तान से भाग कर भारत आई Seema Haider की कहानी धीरे-धीरे दिलचस्प होती जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, उसकी कहानी में ट्विस्ट भी आ रहे हैं। अब तक की पूछताछ में यह तो साफ हो ही गया है कि सीमा ने जो कहानी खुफिया एजेंसियों और मीडिया को सुनाई है, वह पूरी तरह से सच नहीं है। ऐसे में खुफिया एजेंसी उससे पूछे गए हर एक सवाल और उनके जवाबों की बार-बार विवेचना कर रही हैं।

जांच एजेंसियां सीमा हैदर मामले में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। इसीलिए सीमा लगातार खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं, और उनके एक-एक दस्तावेज की बारीकी से जांच भी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सीमा हैदर ने 9 से 10 मई के बीच पाकिस्तान से उड़ान भरने की कहानी खुफिया एजेंसियों को सुनाई है, हालांकि, इसके लिए जल्दबाजी में बनवाए गए दस्तावेज शक पैदा कर रहे हैं। ऐसे में सीमा हैदर मामले में तीन सवालों पर खुफिया अधिकारियों की सुई बार-बार अटक रही है। आइए जानते हैं वे तीन सवाल...

जल्दबाजी में क्यों बनाए गए बच्चों के वैक्सीनेशन कार्ड

जानकारी के मुताबिक, सीमा हैदर नेपाल का वीजा लेकर 11 मई को नेपाल पहुंची थी। जबकि, उसने अपने चारों बच्चों के वैक्सीनेशन कार्ड 8 मई को तैयार कराए थे। खुफिया एजेंसियों को शक है कि चार बच्चों की मां सीमा हैदर ने आनन-फानन में अपने बच्चों के वैक्शीनेशन कार्ड क्यों तैयार कराए? उसने मां बनने से लेकर बीते 7 सालों में इन्हें तैयार क्यों नहीं कराया था? जबकि ये कार्ड हर बच्चे के जन्म के साथ ही बनने चाहिए थे।

परिवार रजिस्ट्रेशन कार्ड लेकर भारत क्यों आई सीमा?

सीमा हैदर अपने साथ पाकिस्तान का परिवार रजिस्ट्रेशन कार्ड भी लेकर आई हैं। इस कार्ड में उनके पति गुलाम हैदर, सीमा हैदर औरन उनके चारों बच्चों के नाम दर्ज हैं। खुफिया एजेंसियों को सीमा की इस कहानी पर भी शक है कि वह अपने साथ इस परिवार रजिस्ट्रेशन कार्ड को क्यों लेकर आई हैं? क्या इसके पीछे भी कोई कहानी है।

54 दिन तक क्यों संभाल कर रखा बस टिकट?

सीमा हैदर नेपाल के पोखरा से बस से दिल्ली पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने जो बस टिकट लिया, उसे संभाल कर रखा था। जबकि, अमूमन लोग अपने बस टिकट को फेंक देते हैं। सीमा हैदर ने जांच शुरू होने के बाद बस टिकट दिखाए। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि उन्होंने 54 दिन तक बस टिकट को इतना संभाल कर क्यों रखा हुआ था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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