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'चुनाव और पार्टी ने मेरी बेटी की जान ले ली', कांग्रेस कार्यकर्ता की मां ने किया सनसनीखेज खुलासा; जानें क्या-क्या कहा

Rohtak: हरियाणा के रोहतक में एक दिन कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता का शव एक सूटकेस में मिला। जिसके बाद अब मृतका हिमानी की मां ने कई बड़े दावे किए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता की मां सविता ने दावा किया है कि चुनाव और पार्टी ने उनकी बेटी की जान ले ली। उन्होंने कहा है कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, वो अपनी बेटी का अंतिम संस्कार नहीं करेंगी।

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कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता हिमानी नरवाल की मां ने क्या कहा?

Body of a woman Congress worker found in a suitcase: हरियाणा के रोहतक जिले में सांपला बस अड्डे के पास शनिवार को सूटकेस में कांग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता का शव मिला। जिसके बाद से सियासी हड़कंप मच गया है। इस युवती की शिनाख्त हिमानी नरवाल के रूप में हुई है, जो राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में भी नजर आई थी। पुलिस ने बताया कि महिला रोहतक के विजय नगर की निवासी थी और उसकी उम्र करीब 22 वर्ष थी। हिमानी की मां ने ये दावा किया है कि पार्टी और चुनाव ने उनकी बेटी की जान ले ली।

कांग्रेस कार्यकर्ता हिमानी की मां ने क्या कुछ कहा?

मृतक हिमानी नरवाल की मां सविता कहती हैं, 'चुनाव और पार्टी ने मेरी बेटी की जान ले ली। इस वजह से उसने कुछ दुश्मन बना लिए। ये (अपराधी) पार्टी से भी हो सकते हैं, उसके दोस्त भी हो सकते हैं...28 फरवरी को वह घर पर थी...हमें पुलिस स्टेशन से (घटना के बारे में) फोन आया। मेरी बेटी आशा हुड्डा (भूपिंदर सिंह हुड्डा की पत्नी) के बहुत करीब थी, जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता, मैं उसका अंतिम संस्कार नहीं करूंगी...हां (पारिवारिक विवाद) था, हम थोड़े डर में रहते थे।'

हिमानी की मां ने आगे कहा कि 'मैं अपने बेटे को यहां से बीएसएफ कैंप ले गई, मेरे बड़े बेटे की 2011 में हत्या कर दी गई और हमें कभी न्याय नहीं मिला। इसलिए, मैं उसे (दूसरे बेटे को) उसकी जान बचाने के लिए बीएसएफ कैंप ले गई। चुनाव के बाद, वह पार्टी से थोड़ा निराश हो गई थी। उसने कहा कि उसे नौकरी चाहिए और वह पार्टी के लिए ज्यादा काम नहीं करना चाहती। वह पिछले 10 सालों से कांग्रेस से जुड़ी हुई थी। वह शादी करने के लिए भी राजी हो गई थी। मैंने सुबह आशा हुड्डा को फोन किया था, लेकिन मेरा फोन रिसीव नहीं हुआ।' वहीं मृतका के भाई जतिन कहते हैं कि 'उन्होंने राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की थी।'

सूटकेस में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता का शव मिला

कुछ राहगीरों ने शनिवार को रोहतक में सूटकेस देखा और पुलिस को इसकी सूचना दी। सांपला थाने के निरीक्षक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रोहतक में हुई इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। हुड्डा ने एक बयान में कहा, 'इस तरह से हत्या करना और उसका शव सूटकेस में मिलना बेहद दुखद तथा चौंकाने वाला है। यह अपने आप में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक धब्बा है, इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए।'

उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अगर ऐसी कोई घटना होती है तो सरकार और पूरी कानून व्यवस्था को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति ऐसी हरकत करने से पहले हजार बार सोचे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस दुखद घटना से एक बार फिर यह उजागर हो गया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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