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MVA से अलग नहीं हुई है समाजवादी पार्टी; अबू आजमी की घोषणा पर आया शरद पवार का जवाब

Maharashtra Politics: क्या महाराष्ट्र में एमवीए और सपा का साथ टूट गया है या नहीं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि सपा नेता अबू आजमी के एमवीए छोड़ने की घोषणा पर शरद पवार ने कहा है कि समाजवादी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व विपक्षी एकता पर अडिग है। उद्धव ठाकरे के सहयोगी के बाबरी मस्जिद संबंधी पोस्ट के बाद आज ही सपा नेता ने एमवीए से बाहर निकलने का निर्णय लिया था।

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शरद पवार और अखिलेश यादव।

Sharad Pawar on Samajwadi Party: शरद पवार ने सपा नेता अबू आजमी के एमवीए छोड़ने की घोषणा पर कहा है कि समाजवादी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व विपक्षी एकता पर अडिग है। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के 23 नवंबर को आए नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत ‘महायुति’ गठबंधन को मिली भारी जीत के बाद राज्य की जनता में कोई उत्साह या खुशी नहीं दिखाई दे रही।

महायुति पर शरद पवार ने कसा तीखा तंज

शरद पवार ने पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि विपक्ष को चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे इस झटके के बाद जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए)यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा कि सरकार अपने सभी चुनाव पूर्व वादों पर अमल करे, जिनमें ‘लाडकी बहिन’योजना के तहत महिलाओं को हर माह वित्तीय सहायता 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करना शामिल है। राजनीति में दशकों का अनुभव रखने वाले पवार ने कहा, ‘‘महायुति को मिले भारी जनादेश के बाद लोगों में कोई उत्साह नहीं दिख रहा है।’’ पवार नीत पार्टी 288 सदस्यीय विधानसभा में केवल 10 सीट पर विजयी हुई है।

सचमुच महाराष्ट्र में एमवीए का साथ छोड़ रही है सपा?

शरद पवार ने सपा नेता अबू आजमी के एमवीए छोड़ने की घोषणा को लेकर सवाल पर कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) का केंद्रीय नेतृत्व विपक्षी एकता पर अडिग है। सपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष आजमी ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूटीबी) के कारण एमवीए से अलग हो रही है क्योंकि ठाकरे के करीबी ने दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाने वालों की प्रशंसा की है।

महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के सवाल पर पवार ने कहा कि एमवीए के घटक दल इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि उन्हें यह पद मिले, क्योंकि उनके पास आवश्यक संख्याबल नहीं है। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में समाजवादी पार्टी के दो विधायक हैं।

किस पोस्ट के बाद भड़के सपा नेता अबू आजमी?

सपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख अबू आजमी ने कहा, ‘‘शिवसेना (यूटीबी) द्वारा बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के लिए लोगों को बधाई देते हुए एक अखबार में विज्ञापन दिया गया था। उनके (उद्धव ठाकरे के) सहयोगी ने भी मस्जिद को ढहाये जाने की सराहना करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया है।’’ आजमी ने से कहा, ‘‘हम एमवीए छोड़ रहे हैं। मैं (समाजवादी पार्टी अध्यक्ष) अखिलेश सिंह यादव से बात कर रहा हूं।’’ शिवसेना (यूटीबी) के विधान पार्षद मिलिंद नार्वेकर ने बाबरी मस्जिद ढहाये जाने की घटना पर एक पोस्ट किया था, जिसके जवाब में सपा ने यह कदम उठाया।

नार्वेकर ने मस्जिद ढहाये जाने की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसके साथ ही शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का कथन लिखा, ‘‘मुझे उन लोगों पर गर्व है जिन्होंने यह किया।’’ शिवसेना (यूटीबी) सचिव ने पोस्ट में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और स्वयं की तस्वीरें भी पोस्ट कीं। आजमी ने कहा, ‘‘यदि एमवीए में कोई भी ऐसी भाषा बोलता है, तो भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) और उनके बीच क्या अंतर है? हमें उनके साथ क्यों रहना चाहिए?’’ उन्होंने कहा कि मस्जिद को ढहा दिया गया और इसके लिए किसी को सजा नहीं हुई। साथ ही उन्होंने कहा कि लोग इसे भूल गए हैं लेकिन घाव फिर से कुरेदे जा रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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