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'भाजपा गौशाला से दुर्गंध फैलाती है, हम इत्र से सुगंध...' अखिलेश यादव के विवादित बोल; जानें सारा माजरा

सपा प्रमुख ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। अखिलेश यादव ने कहा है कि 'भाजपा गौशाला से दुर्गंध फैलाती है, हम इत्र से सुगंध'। उन्होंने कहा कि मैं कन्नौज के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे भाजपा द्वारा फैलाई गई इस दुर्गंध को दूर करें- कुछ हद तक यह पहले ही साफ हो चुकी है, लेकिन अगले चुनाव में इसे पूरी तरह से हटा दें।

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अखिलेश यादव।

Photo : Twitter

Akhilesh Yadav's Controversial Statement: समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 'गौशाला की दुर्गंध' बनाम 'इत्र की सुगंध' बयान ने सियासी पारे को बढ़ा दिया है। उनके मुताबिक भाजपा गौशाला के जरिए दुर्गंध फैला रही है जबकि उनकी पार्टी इत्र के जरिए सुगंध फैला रही है। कन्नौज पहुंचे उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम ने वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर भी विवादित टिप्पणी की।

'अगर मैं यह कहूं कि मेरे आदर्श योगी जी हैं, तो हम पगला जाएंगे'

सपा प्रमुख ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अगर मैं यह कहूं कि मेरे आदर्श योगी जी हैं, तो हम पगला जाएंगे। जरा सोचिए, मुझे किस तरह के कपड़े पहनने पड़ते। हमारे आदर्श कौन हैं? हमारे आदर्श लोहिया जी हैं। हम डॉ. बीआर अंबेडकर के रास्ते पर चलते हैं। हम नेताजी के दिखाए रास्ते पर चलते हैं। हम समाजवादी विकास और समृद्धि के लिए प्रयास करते हैं।'

'हमने भाईचारे की खुशबू फैलाई, भाजपा नफरत की बदबू फैलाती है'

सपा अध्यक्ष ने आगे कहा, 'कन्नौज में हमने भाईचारे की खुशबू फैलाई है। दूसरी तरफ भाजपा नफरत की बदबू फैलाती है। मैं कन्नौज के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे भाजपा द्वारा फैलाई गई इस दुर्गंध को दूर करें- कुछ हद तक यह पहले ही साफ हो चुकी है, लेकिन अगले चुनाव में इसे पूरी तरह से हटा दें ताकि कन्नौज का रुका हुआ विकास आगे बढ़ सके।'

इसके बाद अखिलेश ने गौशाला को लेकर विवादित टिप्पणी की। कहा, 'भाजपा के लोग दुर्गंध पसंद करते हैं, इसलिए गौशाला बना रहे हैं। हम सुगंध पसंद कर रहे थे, इसलिए इत्र पार्क बना रहे थे। यूपी की योगी सरकार प्रदेश में सांड पकड़ने का काम कर रही है।'

एक बोतल पर एक फ्री वाली स्कीम पर अखिलेश ने योगी पर निशाना साधा

शराब के ठेकों पर एक बोतल पर एक फ्री वाली स्कीम पर सपा प्रमुख ने कहा कि यह योगी जी का पार्टी टाइम है। हम सभी के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी टाइम शुरू किया है। यह कैसी सरकार है जो नवरात्र के मौके पर एक बोतल पर एक बोतल फ्री की योजना लाई है?

बता दें कि 31 मार्च तक पुराने स्टॉक को खत्म करने के लिए अंग्रेजी शराब के ठेकों पर ऑफर दिया जा रहा है, जिसे लेकर शराब के ठेकों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। एक बोतल पर एक फ्री वाली स्कीम पर योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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