बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट पर समर्थन की मांग कर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने उम्मीदवार उतारने की घोषणा करते हुए दोनों प्रमुख गठबंधनों से समर्थन की अपील की है, जिससे महागठबंधन असमंजस की स्थिति में आ गया है।
बिहार से राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं। इनमें से पांच सीटें संबंधित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हो रही हैं। इनमें हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर (JDU), प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (RJD) तथा उपेंद्र कुशवाहा (रालोमो) शामिल हैं।हालिया विधानसभा चुनावों के बाद बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का संयुक्त आंकड़ा 202 तक पहुंच गया है। इस संख्या बल के आधार पर सत्तारूढ़ गठबंधन चार सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में है।
हालांकि पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी, जिससे एक सीट पर चुनाव की स्थिति बन सकती है।
इस बीच एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने कहा कि उनकी पार्टी धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की पक्षधर है और संसद से लेकर विधानसभा तक इन मुद्दों को उठाती रही है।
एक विधायक के वोट का मूल्य 100 होता है
उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष दलों को एआईएमआईएम का समर्थन करना चाहिए। महागठबंधन द्वारा समर्थन नहीं देने की स्थिति पर उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में पार्टी का आलाकमान आगे की रणनीति पर विचार करेगा।बिहार में राज्यसभा चुनाव के गणित के तहत एक विधायक के वोट का मूल्य 100 होता है।
एक सीट जीतने के लिए 40.5 विधायकों के मतों की आवश्यकता
इस प्रकार एक सीट जीतने के लिए 40.5 विधायकों के मतों की आवश्यकता होती है, जिसे पूर्णांक में 41 माना जाता है। इस हिसाब से पांचों सीटें जीतने के लिए राजग को 205 विधायकों का समर्थन चाहिए। मौजूदा संख्या बल के आधार पर वह चार सीटें आसानी से जीत सकता है।
