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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस: 22 आरोपियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI समेत सभी को नोटिस किया जारी, अमित शाह को राहत

सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में 22 आरोपियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI, बॉम्बे हाईकोर्ट और बरी किए गए 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया है। याचिका सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन शेख ने दाखिल की है। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

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सोहराबुद्दीन केस में CBI समेत सभी को नोटिस।

साल 2005 के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता खुल गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है, जिसमें 22 आरोपियों को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। अमित शाह को इस मामले में बड़ी राहत मिली है।

यह याचिका सोहराबुद्दीन शेख के भाई रूबाबुद्दीन शेख की ओर से दायर की गई है। उन्होंने 7 मई 2026 को आए बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने विशेष CBI अदालत के दिसंबर 2018 के फैसले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने किन्हें नोटिस जारी किया?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में CBI और हाईकोर्ट से बरी किए गए 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया है। याचिका में हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा की मांग की गई है। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है।

सोहराबुद्दीन शेख की 26 नवंबर 2005 को गुजरात में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत भी इस मामले से जुड़ी थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि इन मौतों के पीछे पुलिस अधिकारियों की साजिश थी और सोहराबुद्दीन तथा अन्य को कथित तौर पर अगवा करने के बाद मुठभेड़ का रूप दिया गया।

अमित शाह पर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अमित शाह को मामले में मिली क्लीन चिट यानी डिस्चार्ज के फैसले को दोबारा नहीं देखेगा। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मनियार कल्पेश कुमार नाम के एक व्यक्ति ने अमित शाह को दिसंबर 2014 में ट्रायल कोर्ट से मिले डिस्चार्ज को चुनौती दी थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि अमित शाह के डिस्चार्ज को चुनौती देने वाली याचिकाएं पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुके हैं। इसके बावजूद इन बातों का जिक्र किए बिना नई अर्जी दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह अर्जी राजनीतिक विरोधियों के इशारे पर किसी दूसरे मकसद से दाखिल की गई लगती है।

सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने साफ कहा कि कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 43 में नहीं जाएगा। यानी अमित शाह के डिस्चार्ज के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट दोबारा नहीं खोलेगा।

दिसंबर 2018 में 22 आरोपी हुए थे बरी

मामले की सुनवाई विशेष सीबीआई अदालत में हुई थी। दिसंबर 2018 में अदालत ने सबूतों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 7 मई 2026 को इस फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक अभियोजन पक्ष की कहानी को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत सामने नहीं आए और कई गवाह भी अपने बयानों से मुकर गए थे।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

7 मई के फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष सोहराबुद्दीन शेख, कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति के कथित अपहरण, हिरासत और फर्जी एनकाउंटर की अपनी कहानी स्थापित नहीं कर सका। फैसले में यह भी दर्ज है कि अभियोजन पक्ष ने 210 गवाहों से पूछताछ की थी, जिनमें 92 गवाह अपने पहले के कथित बयानों से मुकर गए।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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