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हरियाणा कांग्रेस में मंथन तेज—विधानसभा चुनाव की टीस अब भी बाकी, संगठन में बड़े बदलाव के संकेत

कांग्रेस नेतृत्व ने इशारों में स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव में राज्य में सियासी असंतुलन हुआ, जो आगे नहीं होगा। कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि हुड्डा खेमे के ज़्यादा उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने के चलते अन्य गुट हाशिए पर चले गए, जिसका असर नतीजों पर पड़ा।

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कांग्रेस की मीटिंग

हरियाणा विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार के बाद कांग्रेस आलाकमान पूरी गंभीरता से राज्य इकाई में बदलाव की तैयारी में जुट गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की हरियाणा कांग्रेस नेताओं के साथ अहम बैठक हुई, जिसमें बीते चुनाव की समीक्षा और भविष्य की रणनीति को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया।

सच को स्वीकार कीजिए, बहाने मत बनाइए – राहुल गांधी का दो टूक

बैठक के दौरान जब कुछ नेताओं ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे वोट प्रतिशत का हवाला देते हुए हार को संतुलित करने की कोशिश की, तो राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा- “वोट प्रतिशत की दुहाई मत दीजिए, सच्चाई को स्वीकार कीजिए। हम जीता हुआ मुकाबला हार गए हैं।”

राहुल के इस तीखे बयान से साफ है कि पार्टी हार के असल कारणों पर पर्दा डालने को तैयार नहीं है।

गुटबाजी और टिकट बंटवारे पर भी उठे सवाल

बैठक में एक अहम मुद्दा टिकट वितरण को लेकर रहा, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव को लेकर असंतोष सामने आया। कांग्रेस नेतृत्व ने इशारों में स्वीकार किया कि “विधानसभा चुनाव में राज्य में सियासी असंतुलन हुआ, जो आगे नहीं होगा।” कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि हुड्डा खेमे के ज़्यादा उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने के चलते अन्य गुट हाशिए पर चले गए, जिसका असर नतीजों पर पड़ा।

अब संगठन में बदलाव की बारी

राहुल गांधी ने संकेत दिए हैं कि अगले दो महीनों में हरियाणा को पूरी तरह नया संगठन मिलेगा। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता का चयन होगा, इसके बाद जिला इकाइयों में फेरबदल होगा। संगठन के पुनर्गठन में युवा और गैर-हुड्डा नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है।

भविष्य की तैयारी, लेकिन बीते जख्म अभी हरे

हरियाणा चुनाव की टीस कांग्रेस आलाकमान के भीतर अब भी महसूस की जा रही है। पार्टी मान रही है कि अगर गुटबाजी को नियंत्रित किया गया होता और टिकट बंटवारे में संतुलन बरता गया होता, तो नतीजा बिल्कुल अलग हो सकता था। अब पार्टी की रणनीति है कि समय रहते संगठन को मज़बूत किया जाए, ताकि लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मज़बूत स्थिति में उतर सके।

Ranjeeta Jha
रंजीता झाauthor

13 साल के राजनीतिक पत्रकारिता के अनुभव में मैंने राज्य की राजधानियों से लेकर देश की राजधानी तक सियासी हलचल को करीब से देखा है। प्लांट की गई बातें ख़बरें नहीं होती बल्कि बातों के पीछे छुपी सच्चाई असली ख़बर होती है। खबरें वही जो आपके सरोकार की हो वो आपतक लेकर आऊंगी।

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