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दिल्ली में तीसरी रिंग रोड दिलाएगी जाम से मुक्ति! 55 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर, 6 फेज में होगा तैयार

दिल्ली में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए 55 किलोमीटर लंबी समानांतर एलिवेटेड रिंग रोड बनाने की योजना है। करीब 7,000 करोड़ रुपये की परियोजना को छह फेज में पूरा किया जाएगा।

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दिल्ली में जाम से राहत के लिए नई रिंग रोड की तैयारी (सांकेतिक फोटो)

Delhi Ring Road Project: दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने एक नई समानांतर रिंग रोड की योजना पर काम तेज कर दिया है। प्रस्तावित 55 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर मौजूदा इनर और आउटर रिंग रोड के समानांतर बनाई जाएगी। इसके निर्माण के बाद उत्तर से दक्षिण दिल्ली के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 मिनट तक हो सकता है।

लोक निर्माण विभाग (PWD) और ट्रैफिक पुलिस द्वारा शहर के प्रमुख चोक पॉइंट्स यानी जाम वाले हिस्सों की पहचान कर ली गई है। जिसके बाद कंसल्टेंट फर्म 'एईकॉम इंडिया' ने इस परियोजना की DPR तैयार कर ली है। परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत करीब 7,000 करोड़ रुपये बताई गई है। इसे 6 चरणों में पूरा किया जाएगा।

मुकरबा चौक से आश्रम तक पहला चरण

परियोजना के तहत पहले चरण में मुकरबा चौक से आश्रम तक के हिस्से का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद कुछ महत्वपूर्ण कॉरिडोर को प्राथमिकता देने की योजना है। इनमें आजादपुर फ्लाईओवर से ISBT हनुमान मंदिर तक 9.5 किलोमीटर, चांदगी राम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर और ISBT से DND फ्लाईओवर तक 11.5 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। सरकार का फोकस ऐसे रूट तैयार करने पर है, जहां वाहनों को बार-बार रुकना न पड़े और उत्तर से दक्षिण दिल्ली के बीच आवाजाही आसान हो सके।

पीक आवर में रिंग रोड पर वाहनों का भारी दबाव

इस परियोजना के लिए दिल्ली में ट्रैफिक के लिहाज से जिन 10 बड़े चोक पॉइंट्स की पहचान की गई है, उनमें रिंग रोड, मथुरा रोड, अरबिंदो मार्ग, महरौली-महिपालपुर रोड और रानी झांसी रोड जैसे प्रमुख रास्ते शामिल हैं। पीक आवर के दौरान रिंग रोड पर 2.5 लाख से अधिक वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में एक समानांतर रिंग रोड को जरूरी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि जाम की समस्या से राहत मिल सके।

परियोजना से जुड़ी चुनौतियां

दिल्ली सरकार ने 2026-27 के बजट में इस परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। हालांकि, जमीन से जुड़े काम और निर्माण शुरू होने से पहले कई बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। योजना के मुताबिक भूमि अधिग्रहण और पेड़ों से जुड़े काम में कम से कम दो साल तक का समय लग सकता है। मौजूदा रिंग रोड के ऊपर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की स्थिति में यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली-पानी की लाइनों को हटाना) को भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

पहले भी कई बार अटक चुकी है ऐसी योजना

नई समानांतर रिंग रोड की योजना पहली बार सामने नहीं आई है। पिछले 10 सालों में इसी तरह की रिंग रोड का प्रस्ताव तीन बार ठंडे बस्ते में जा चुका है। ऐसे में इस बार परियोजना को जमीन पर उतारना सरकार और PWD के लिए बड़ी चुनौती होगी। दिल्ली सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में सड़क और बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से 24 मार्च 2026 को पेश बजट में PWD के लिए 5,921 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जो पिछले साल के 3,843 करोड़ रुपये से करीब 54 फीसदी ज्यादा है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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