CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश में वित्तीय अपराधों और धन शोधन (Money Laundering) के मामलों में जांच और जब्ती की बेहद सुस्त दर को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने खुलासा किया कि अवैध रूप से कमाए गए या विदेशों में भेजे गए प्रति 100 रुपये में से जांच एजेंसियां केवल 1 रुपया ही बरामद करने में सफल हो पाती हैं।
CJI ने कहा, मामूली रिकवरी रेट
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मनी लॉन्ड्रिंग का 99% पैसा सिस्टम से बाहर ही रहता है या गायब हो जाता है। CJI ने कहा कि केवल मामले दर्ज करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने से वित्तीय अपराधों पर अंकुश नहीं लगेगा। असली सफलता इसमें है कि अवैध रूप से जुटाई गई संपत्ति को जब्त कर सरकारी खजाने में वापस लाया जाए।
न्यायिक प्रक्रिया में देरी
मुकदमों के वर्षों तक लंबित रहने और फॉरेंसिक/डिजिटल जांच में दक्षता की कमी को भी इस निम्न रिकवरी दर के लिए जिम्मेदार बताया गया। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानदंड (FATF): फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मानकों का हवाला देते हुए CJI ने कहा कि भारत को वित्तीय अपराधों पर नकेल कसने के लिए अपनी जांच तकनीकों और अभियोजन की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना होगा।
टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक ऑडिट
उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक जांच के तरीकों के बजाय अब एजेंसियों को एआई (AI), ब्लॉकचेन ट्रैकिंग और उन्नत फॉरेंसिक वित्तीय विश्लेषण का सहारा लेना होगा। जब तक हम मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए खड़ी की गई अवैध संपत्तियों को तेजी से जब्त करने और उन्हें वापस पाने में सक्षम नहीं होंगे, तब तक केवल गिरफ्तारियां करने से वित्तीय अपराधियों में डर पैदा नहीं होगा।
