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Women Reservation Bill: बिल तो विपक्ष के कारण गिरा... तो फिर PM मोदी ने देश की महिलाओं से क्यों मांगी माफी?

Women Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल (131वां) गिरने के बाद PM मोदी ने देश की महिलाओं से माफी मांगी है। जानें बिल क्यों गिरा और पीएम ने इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए क्या कहा।

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बिल गिरने पर पीएम मोदी ने देश की महिलाओं से मांगी माफी (X/@BJP4India)

Photo : Twitter

Women Reservation Bill: संसद के गलियारों से लेकर देश की चौपालों तक इस समय एक ही चर्चा है, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक' का गिरना। लोकसभा में शुक्रवार को जो हुआ, उसने देश की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। बिल के गिरते ही जहां विपक्षी खेमों में रणनीतिक जीत की मुस्कुराहट दिखी, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम देश के नाम अपने संबोधन में एक ऐसी बात कही जिसने सबको चौंका दिया। प्रधानमंत्री ने न केवल विपक्ष पर तीखा हमला बोला, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी। आइए समझते हैं कि बिल विपक्ष की वजह से गिरा, तो फिर पीएम ने माफी क्यों मांगी और इस पूरे घटनाक्रम के सियासी मायने क्या हैं।

संसद में क्या हुआ?

महिला आरक्षण कानून में संशोधन वाला 131वां बिल शुक्रवार को लोकसभा में मतदान के लिए लाया गया था। संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत अनिवार्य होता है। हालांकि NDA के पास साधारण बहुमत है, लेकिन इस विशेष विधेयक के लिए जरूरी जादुई आंकड़े तक वह नहीं पहुंच सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट। बहुमत के बावजूद तकनीकी रूप से यह बिल गिर गया, क्योंकि इसे दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन नहीं मिला।

PM मोदी ने क्यों मांगी माफी?

अक्सर राजनीति में नेता अपनी जीत का श्रेय लेते हैं और हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ते हैं। लेकिन पीएम मोदी का माफी मांगना उनकी एक गहरी राजनीतिक और भावनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण दिखाई देते हैं। जिसमें पहला है, नैतिक जिम्मेदारी का अहसास। पीएम ने कहा, "हमारे भरसक प्रयासों के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए... मैं सभी माताओं, बहनों से माफी चाहता हूं।" उन्होंने खुद को एक ऐसे 'बेटे' और 'भाई' के रूप में पेश किया जो अपनी बहनों के लिए अधिकार लाना चाहता था, लेकिन सिस्टम या विपक्ष की बाधाओं के कारण विफल रहा। दूसरा कारण भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connect) है। माफी मांगकर पीएम ने सीधे महिलाओं के साथ एक 'इमोशनल कार्ड' खेला है। उन्होंने यह संदेश दिया कि उनकी मंशा नेक थी, लेकिन विपक्षी पार्टियों ने इसे सफल नहीं होने दिया। और तीसरा कारण है, विपक्ष को 'महिला विरोधी' साबित करना। माफी मांगते समय पीएम ने कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां बिल गिरने पर खुशियां मना रही थीं। उन्होंने इस माफी को विपक्ष के खिलाफ एक हथियार बना दिया, ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि बीजेपी महिलाओं को हक देना चाहती है और विपक्ष उसे छीन रहा है।

विपक्ष ने बताया संविधान पर हमला

वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि मोदी सरकार संविधान के मूल ढांचे के साथ खिलवाड़ कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि इस संशोधन के जरिए दक्षिण भारतीय और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और उनकी ताकत को कम करने की कोशिश हो रही है। उनके मुताबिक, यह लड़ाई सिर्फ महिला आरक्षण की नहीं, बल्कि राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे की रक्षा की है।

बिल गिरने का क्या असर होगा?

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का गिरना भारतीय राजनीति में एक बड़े ध्रुवीकरण का कारण बनेगा। इसका सबसे सीधा प्रभाव चुनावी विमर्श पर पड़ेगा, जहां भाजपा अब विपक्ष को 'महिला विरोधी' और विकास में बाधक बताकर बंगाल और अन्य राज्यों में महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर, विपक्ष इसे अपनी रणनीतिक जीत और 'संघवाद की रक्षा' के रूप में पेश करेगा, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों में केंद्र के प्रति अविश्वास और गहरा सकता है। तकनीकी रूप से, 2023 के मूल कानून की अधिसूचना जारी होने से यह मुद्दा अब जनगणना और भविष्य के परिसीमन पर टिक गया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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