Times Now Navbharat
live-tv
Premium

बीजेपी हारी या खेल गई मास्टरस्ट्रोक? समझें महिला आरक्षण बिल पर TMC को कैसे लग सकता है जोर का झटका

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है। सरकार जरूरी बहुमत से पीछे रह गई और विपक्ष ने इसे बड़ी जीत के रूप में पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर महिलाओं से माफी मांगते हुए विपक्षी दलों पर नारी शक्ति के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए खासकर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। अब यह मुद्दा खासकर बंगाल की राजनीति में महिला मतदाताओं के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

Image
संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने पर बीजेपी ने टीएमसी पर साधा निशाना।
Authored by: Piyush Kumar
Updated Apr 19, 2026, 11:16 IST

"संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन का जिन भी दलों ने विरोध किया है, वे नारी शक्ति को बहुत ही सहजता से ले रहे हैं। महिलाएं इस घटना को कभी नहीं भूलेंगी।" महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) संसद में पारित न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं से क्षमा मांगी। हालांकि, सरकार ने इस विधेयक को कानून बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन विपक्ष का साथ सत्तापक्ष को नहीं मिला।

संसद में इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या बल 352 था, जिससे सरकार 54 मत पीछे रह गई। सदन में उपस्थित कुल 352 सदस्यों में से 230 सदस्यों ने इस विधेयक के विरुद्ध मतदान किया। पिछले 12 वर्षों में यह पहला अवसर है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिर गया है। विपक्षी दलों में इस बात का हर्ष था कि मोदी सरकार को पराजय का सामना करना पड़ा।

हालांकि, सियासी पिक्चर तो सदन में विधेयक के विफल होने के बाद शुरू हुई। अमूमन सड़कों से उठी आवाज संसद तक पहुंचती है, लेकिन इस बार संसद की गूंज सड़कों पर सुनाई दे रही है। संसद में विधेयक के विफल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के दामन पर 'महिला विरोधी' होने का कलंक लगा दिया है।

महिला आरक्षण बिल पारित न होने के बाद बीजेपी महिला सांसदों ने किया विरोध।

महिला आरक्षण बिल पारित न होने के बाद बीजेपी महिला सांसदों ने किया विरोध।

पश्चिम बंगाल की जिस मृदुभाषी महिला, गीता मुखर्जी, जिन्होंने 27 साल पहले संसद में महिला आरक्षण का बीज बोया था, उसी राज्य की सत्ताधारी पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस ने इस विधेयक का विरोध किया। हालांकि, विपक्ष का मतलब सिर्फ तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन मौजूदा समय बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

भाजपा को मिल गया 'अचूक अस्त्र'

महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों पर पहले से ही कटघरे में खड़ी तृणमूल कांग्रेस पर प्रहार करने के लिए भाजपा को एक 'अचूक अस्त्र' मिल गया है। राज्य के राजनीतिक इतिहास पर दृष्टि डालें तो बंगाल में लगभग 5 करोड़ महिला मतदाता हैं। इन महिलाओं ने सदैव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना रक्षक माना है। बंगाल में ममता बनर्जी की सफलता का सबसे बड़ा आधार महिला मतदाता ही रही हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार का साथ न देकर तृणमूल कांग्रेस ने सेल्फ गोल कर लिया है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा," तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों की स्वार्थपूर्ण राजनीति का दुष्प्रभाव देश की नारी शक्ति को झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसी पार्टियां इस 'भ्रूण हत्या' की दोषी हैं। ये देश के संविधान और नारी शक्ति की अपराधी हैं।"

संसद सत्र में हिस्सा लेते हुए पीएम मोदी की फाइल फोटो।

संसद सत्र में हिस्सा लेते हुए पीएम मोदी की फाइल फोटो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इसे बंगाल में एक बड़ा मुद्दा बनाने में जुट गई है। भाजपा बंगाल की महिलाओं तक यह संदेश पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि महिला आरक्षण विधेयक के मार्ग में तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां ही बाधक रही हैं।

महिलाओं को लेकर सीएम ममता का दावा

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विधेयक के विफल होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों में 36 प्रतिशत और राज्यसभा में 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। हमारे जैसी कोई दूसरी पार्टी नहीं है। भाजपा को हमसे सीखना चाहिए। मैं वर्ष 1998 से महिला आरक्षण के लिए संघर्ष कर रही हूं।"

स्पष्ट है कि ममता बनर्जी भी स्वयं को महिला हितैषी सिद्ध करने का कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहतीं। अन्य राज्यों की तरह ही बंगाल में भी महिला मतदाताओं को 'साइलेंट वोटर्स' माना जाता है। अब तक ये 'साइलेंट वोटर्स' ममता बनर्जी के पक्ष में मतदान करती रही हैं, लेकिन इस बार भाजपा ने महिलाओं से जुड़े कई ऐसे संवेदनशील मुद्दे उठाए हैं, जिन्होंने राज्य की महिलाओं का ध्यान आकर्षित किया है।

सीएम ममता बनर्जी की फाइल फोटो।

सीएम ममता बनर्जी की फाइल फोटो।

महिला सुरक्षा बना बंगाल का बड़ा मुद्दा

भले ही ममता बनर्जी यह दावा करती रहें कि उनकी पार्टी ने बंगाल की महिलाओं को सर्वाधिक अधिकार दिलाए हैं, परंतु एक कटु सत्य यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों से राज्य में महिला सुरक्षा एक ज्वलंत मुद्दा बन चुकी है।

अगस्त 2024 में कोलकाता के आर.जी. कर चिकित्सा महाविद्यालय में एक महिला चिकित्सक के साथ हुए जघन्य अपराध ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके पश्चात महीनों तक कोलकाता में विरोध प्रदर्शन होते रहे और पीड़िता के परिजनों ने मुख्यमंत्री पर संवेदनहीनता के आरोप भी लगाए। इससे पूर्व भी राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के कई मामले सामने आए थे।

ऐसी घटनाओं ने ममता बनर्जी की सरकार को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है। अब महिला आरक्षण विधेयक के विरोध ने इस आग में घी डालने का कार्य किया है। तृणमूल कांग्रेस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह बंगाल की महिलाओं को कैसे समझाएगी कि इस विधेयक का विरोध करना सही था। इसके विपरीत, भाजपा बंगाल की हर गली और चौराहे तक यह बात पहुँचाने का प्रयास करेगी कि तृणमूल कांग्रेस ने महिलाओं का अधिकार छीना है।

End of Article