NCPI Kakoli Ghosh Dastidar: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक (TMC Boycott All Party Meet) में भारी सियासी ड्रामा देखने को मिला। रविवार को संसद भवन परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह बैठक आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य आगामी सत्र (Parliament Monsoon Session 2026) को सुचारू रूप से चलाना था। इस बैठक में कुल 40 राजनीतिक दलों के 58 नेताओं और मंत्रियों ने हिस्सा लिया। हालांकि, बैठक शुरू होते ही विपक्ष के कुछ नेताओं ने हालिया राजनीतिक फेरबदल के विरोध में वॉकआउट कर दिया, जिस पर अब जुबानी जंग शुरू हो गई है।
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इस रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण बैठक का बहिष्कार करना या वहां से चले जाना पूरी तरह से अभूतपूर्व और अनुचित है। सर्वदलीय बैठक ही वह मंच है जहां देश के भविष्य और विधायी कार्यों की रूपरेखा तय होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि टीएमसी नेतृत्व को इस बात पर आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर उनके अपने 20 सांसद उनसे क्यों नाराज हैं।
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विपक्ष की नाराजगी की वजह
लोकतंत्र इस तरह वॉकआउट करने से नहीं चलता। दूसरी तरफ, विपक्ष के इस कदम पर सरकार का रुख काफी नरम दिखा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विपक्ष के इस कदम को पूरी बैठक का बहिष्कार नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह केवल एक सांकेतिक (सिम्बॉलिक) विरोध था। दरअसल, विपक्ष का यह गुस्सा हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों और उद्धव ठाकरे गुट (UBT) के 6 सांसदों के पाला बदलकर शिवसेना में शामिल होने को लेकर था।
सरकार ला सकती है 131वां संविधान संशोधन विधेयक
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार मानसून सत्र में 131वां संविधान संशोधन विधेयक वापस ला सकती है। इस बिल के जरिए लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रस्ताव है। इन नए समीकरणों के बाद 540 सदस्यों वाली लोकसभा में एनडीए 360 के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंचता दिख रहा है।
