MP UCC Bill: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में मोहन यादव सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में UCC के ड्राफ्ट बिल को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई। अब इस ऐतिहासिक बिल (MP UCC Draft Bill Approved) को सोमवार से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र में चर्चा और पास कराने के लिए पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस ड्राफ्ट बिल को बेहद सोच-समझकर और समाज के सभी वर्गों से सलाह-मशविरा करने के बाद तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि समाज के एक बहुत बड़े हिस्से ने इस कानून का पुरजोर समर्थन किया है। हालांकि, राज्य की सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए इस कानून से आदिवासी (Scheduled Tribes) समुदायों को पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि उनकी परंपराओं पर कोई आंच न आए।
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सामाजिक और आर्थिक स्थितियों के अनुकूल ड्राफ्ट तैयार-मोहन यादव
इस कानून को तैयार करने का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय समिति को सौंपा गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील पारिवारिक मामलों का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद मध्य प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों के अनुकूल यह ड्राफ्ट तैयार किया गया।
दो बड़ी बातें
इस ड्राफ्ट की दो सबसे बड़ी बातें सामने आई हैं। पहली यह कि पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून लागू होने के बाद विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज में लैंगिक समानता (Gender Equality) लाना और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना है। साथ ही, यह भी साफ किया गया है कि लोगों की पारंपरिक और धार्मिक रीतियों-रिवाजों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। अब सबकी नजरें विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां इस पर विस्तृत चर्चा होगी।
