संसद का मानसून सत्र गुरुवार को 25 दिनों में कुल 19 बैठकों के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के दौरान विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच हुए भारी हंगामे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। NCPI की सांसद सायनी घोष (Saayoni Ghosh) ने संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष के रवैये की कड़ी निंदा की है और इसे देश व संसद की गरिमा के खिलाफ बताया है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद सायनी घोष ने कहा कि जनता से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने के लिए संसद का समय बेहद कीमती होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन विपक्ष उनके जवाबों को सुनने के लिए राजी नहीं था। सायनी घोष ने कहा कि गृह मंत्री कभी सवालों से नहीं भागते, बल्कि विपक्ष ही उनके तीखे जवाबों का सामना करने से बचता दिखता है।
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सत्र में 12 बिल हुए पास, इन मुद्दों पर हुआ बवाल
मानसून सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए, जिनमें 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026' पर सदन में चर्चा भी हुई। पूरे सत्र के दौरान विपक्षी दल प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज, अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की चोरी के आरोपों और नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते रहे।
सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार-अमित शाह
सदन के भीतर नारेबाजी और वेल में उतरकर प्रदर्शन के साथ-साथ संसद परिसर के बाहर भी बीजेपी और इंडिया (INDIA) गठबंधन के बीच जमकर विरोध-प्रदर्शन देखे गए। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया था कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल गतिरोध पैदा कर रहा है।
