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2015 के बाद देश में सबसे कमजोर रहा मानसून, 13% बारिश की कमी, जानें कौन-से इलाके रहे सबसे ज्यादा प्रभावित

2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून 13% बारिश की कमी के साथ खत्म हो गया है, यह 2015 के बाद सबसे कमजोर रहा। इस दौरान सबसे कम बारिश किन इलाकों में हुई हैं, आइए जानें।

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देश में 13% कम हुई मानसूनी बारिश (सांकेतिक फोटो | Photo - Canva)

Monsoon 2026: जून में आए मानसून की सितंबर माह के साथ ही विदाई हो गई है। लेकिन इस बार देश को बारिश का वो साथ नहीं मिला, जिसकी उम्मीद थी। चार महीने के मानसूनी सीजन के बाद जब बारिश का हिसाब सामने आया तो तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली रही। IMD के अनुसार, 2026 में देशभर में सामान्य से 13% कम बारिश हुई। इसी के साथ ही यह 2015 के बाद का सबसे कमजोर मानसून साबित हुआ। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ी।

11 साल में सबसे कम बारिश वाला मानसून

IMD के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में देश में मानसूनी बारिश सामान्य औसत का केवल 87% रही। 13 फीसदी की कमी के साथ यह मानसून इस सदी का चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा। 1901 के बाद के रिकॉर्ड में इसे 13वां सबसे कम बारिश वाला मानसून बताया गया है। इससे पहले साल 2015 में मानसूनी बारिश औसत से 10 फीसदी से ज्यादा कम रही थी।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

देशभर के हिसाब से देखें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। इस क्षेत्र में सामान्य से करीब 26% कम बारिश दर्ज की गई। IMD के मुताबिक, यह क्षेत्र 1901 के बाद सबसे कम मानसूनी बारिश सालों में से एक रहा। वहीं, उत्तर-पश्चिमी भारत में करीब 6% और मध्य भारत में लगभग 3% बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई। पूरे मानसून सीजन के दौरान पंजाब, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई।

तीन महीने बारिश में पिछड़े

मानसून के चार महीनों में से तीन में बारिश की कमी दर्ज हुई। जून में बारिश सामान्य से 35 फीसदी से ज्यादा कम रही। वहीं अगस्त में 16.3 फीसदी और सितंबर में 7.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इसका उल्टा ही हाल जुलाई में देखने को मिला। इस माह में सामान्य से करीब 1 फीसदी अधिक बारिश हुई। मानसून के दौरान बारिश का वितरण भी काफी उतार-चढ़ाव वाला देखने को मिला। जुलाई के एक सप्ताह में बारिश सामान्य से 45.4 फीसदी अधिक रही, तो वहीं अगले सप्ताह इसमें 51.1 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

282 जिलों में बारिश सामान्य से कम

IMD के अनुसार, भारत के करीब 38% क्षेत्र यानी 282 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। वहीं 312 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य रहा। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के साथ उत्तर कर्नाटक के कुछ हिस्सों में जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनी रही। वहीं दक्षिण भारत की बात करें, तो इस बार यहां भी मानसून का हाल कमजोर ही रहा। IMD के मुताबिक, सभी दक्षिणी राज्यों में सीजन के अंत तक बारिश सामान्य से कम ही दर्ज हुई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में मानसून पर मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का प्रभाव भी अनुकूल नहीं रहा।

इस मानसूनी सीजन क्यों कम रही बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, इस कमजोर मानसून के पीछे 'अल नीनो' (El Nino) को प्रमुख वजह माना गया है। अल नीनो के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है, जिसका भारत की मानसूनी बारिश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्रों (low pressure systems) की संख्या इस मानसून के दौरान अधिक रही। इस साल देश 57 दिनों के सामान्य औसत के मुकाबले 77 दिन निम्न दबाव प्रणालियों के प्रभाव में रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह अल नीनो इस साल नवंबर में अपने चरम पर पहुंचेगा और मार्च 2027 तक समाप्त हो सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह अल नीनो इस साल नवंबर में अपने चरम पर पहुंचेगा और मार्च 2027 तक समाप्त हो सकता है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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