देश

क्या भारत होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजेगा? बता दी अपनी मंशा, अमेरिका से वार्ता पर भी साफ की स्थिति

हॉर्मुज जलडमरूमध्य ( strait of hormuz issue) को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।

Image

होर्मुज में युद्धपोत भेजेगा भारत? (फोटो- AI)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजरें एक बेहद अहम समुद्री रास्ते पर टिकी हुई हैं और वो है हॉर्मुज जलडमरूमध्य (strait of hormuz issue)। यही वह संकरा समुद्री मार्ग है,जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की सप्लाई गुजरती है। लेकिन मध्य पूर्व में हालिया घटनाक्रमों के बाद यह रास्ता बाधित हो गया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों से इसे खुलवाने के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया है, जिसपर भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। भारत ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि इस जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ उसकी कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है।

होर्मुज को लेकर भारत-अमेरिका की कोई सीधी बात नहीं

सोमवार को नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस विषय पर कई देशों के बीच चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर अभी तक कोई सीधी वार्ता नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस मामले में विभिन्न देशों और हितधारकों के साथ बातचीत जारी रखेगा।

ट्रंप ने क्या कहा?

दरअसल यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों को इस क्षेत्र में जहाज भेजकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह समुद्री मार्ग सुरक्षित और खुला रहे। हालांकि अभी तक इन देशों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तेल बाजार पर असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में ईरान की गतिविधियों के चलते इस मार्ग के लगभग बाधित होने की खबरों ने दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मार्ग पूरी तरह बंद हो गया तो वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

भारत की क्या रणनीति?

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित रुख अपनाते हुए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की बात कही है। विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि भारत का ईरान के साथ ऐसा कोई व्यापक समझौता नहीं है जिससे भारतीय जहाजों को स्वतः सुरक्षित मार्ग मिल सके। हालांकि उन्होंने यह जरूर बताया कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर तेहरान के साथ बातचीत जारी है और उसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।

शिवालिक और नंदा देवी होर्मुज कर चुके हैं पार

इस बीच राहत की खबर यह रही कि भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर-‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ करीब 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। संकट के इस समय में भारत ने एक बार फिर कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए सभी देशों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी टकराव को बढ़ाने के बजाय संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में समाधान निकालना चाहिए।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।

Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

End of Article