Deadlock in Parliament: संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर अपना बयान नहीं देते, तब तक यह गतिरोध समाप्त नहीं होगा। संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, मुझे लगता है कि जब तक गृह मंत्री संसद में बयान नहीं देते, तब तक यह गतिरोध जारी रहेगा।
गतिरोध की मुख्य वजह और विपक्ष की मांग
विपक्ष और 'इंडिया' गठबंधन के घटक दल पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के सदन में जवाब की मांग कर रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अपने भविष्य के लिए सवाल पूछ रहे शांतिपूर्ण छात्रों पर गोलियां और लाठियां चलाई गईं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री की चुप रहने की नीति हिंसा को उनकी मंजूरी दर्शाती है।
के.सी. वेणुगोपाल का रुख
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी बाहर संवाददाताओं से कहा कि जब तक गृह मंत्री दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर बयान नहीं देते, तब तक संसद का गतिरोध खत्म करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संसद के इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया जाना है, जिनमें विदेश अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 (FCRA Bill, 2026), परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण विधेयक जैसे विषय शामिल हैं।
इमरान मसूद का आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार FCRA संशोधन विधेयक और परिसीमन के जरिए राष्ट्रीय संस्थाओं पर पूर्ण नियंत्रण पाना चाहती है और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इस विधेयक के जरिए नागरिक समाज संगठनों (NGOs) और विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है, जिसका वे पूरी ताकत से विरोध करेंगे।
संसद में परिसर प्रदर्शन और कार्यवाही स्थगित
सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन और अयोध्या राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर संसद परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे और नारों के चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और बैठकों को स्थगित करना पड़ा।
