भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर अपनी स्थिति दुनिया के सामने एक बार फिर साफ कर दी है। विदेश मंत्रालय ने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं। यह बयान बर्मिंघम के मेयर जाकर चौधरी की कश्मीर को लेकर हालिया टिप्पणियों के बाद आया है। प्रेस कांफ्रेंस में विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के साथ संबंधों,नेपाल में बाढ़ के बाद चलाए जा रहे राहत अभियान,रूस-यूक्रेन युद्ध और देश की ऊर्जा जरूरतों को लेकर भी भारत का रुख सामने रखा।
कश्मीर पर दो टूक जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का हिस्सा हैं और इन क्षेत्रों की स्थिति को लेकर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। बर्मिंघम के मेयर जाकर चौधरी की ओर से कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्रालय ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े अपने रुख को दोहराया। इस दौरान पाकिस्तान से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत को अपनी स्थिति अच्छी तरह मालूम है और पाकिस्तान से जुड़े विषयों पर उसका रुख पहले से स्पष्ट है।
नेपाल में राहत अभियान को भारत ने किया तेज
नेपाल में बाढ़ और लगातार बारिश के कारण पैदा हुए संकट के बीच भारत ने राहत अभियान को और गति दी है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत नेपाल की आवश्यकताओं के आधार पर सहायता उपलब्ध करा रहा है। जरूरत के अनुसार आने वाले समय में और राहत सामग्री भेजी जाएगी। भारत की ओर से नेपाल को फोरेंसिक किट,बेली ब्रिज और नेपाली पक्ष की ओर से मांगी गई दूसरी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। इनकी आपूर्ति होने के बाद संबंधित जानकारी साझा की जाएगी।
सात उड़ानों से पहुंचाई गई करीब 95 टन सामग्री
विदेश मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार को दो भारतीय विमान काठमांडू पहुंचे। इन विमानों में करीब 21 टन राहत सामग्री थी। इसके साथ ही अब तक सात विमानों के माध्यम से लगभग 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। भारत ने राहत सामग्री के अलावा विशेषज्ञों और बचाव दलों को भी नेपाल भेजा है। कुल 54 भारतीय विशेषज्ञ वहां सहायता कार्य में जुटे हैं। इनमें टनल रेस्क्यू से जुड़े 30 विशेषज्ञ,19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय टीमें नेपाल में स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं।नेपाल में 166 भारतीयों का रेस्क्यू,275 की तलाश जारी
विदेश मंत्रालय ने नेपाल में भारतीय नागरिकों की स्थिति पर भी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि 275 भारतीयों का अभी पता नहीं चल पाया है।
चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे
वहीं, चीन से अब तक 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। मंत्रालय के मुताबिक, चीनी अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में इस समय किसी भारतीय यात्री के फंसे होने की सूचना नहीं है।यूक्रेन युद्ध पर भारत ने फिर दोहराई बातचीत की नीति
विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की यूक्रेन यात्रा के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री ने 3 सितंबर को कीव का दौरा किया, जहां उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। बैठकों के दौरान भारत ने दोहराया कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। भारत का मानना है कि विवादों का हल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तलाशा जाना चाहिए।
शांति प्रयासों में भूमिका निभाने को भारत तैयार
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि युद्ध समाप्त कराने की प्रक्रिया में उसकी कोई रचनात्मक भूमिका हो सकती है, तो वह इसके लिए तैयार है। विदेश मंत्री की यूक्रेन यात्रा को भी संवाद और कूटनीति के जरिए संघर्ष के समाधान की संभावनाएं तलाशने के प्रयास के तौर पर देखा गया।ऊर्जा खरीद पर राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतें और राष्ट्रीय हित उसके फैसलों का आधार हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के सामने करीब 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी है। इसलिए ऊर्जा से जुड़े फैसले देश की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भी भारत इसी दृष्टिकोण के तहत अपनी ऊर्जा नीति को आगे बढ़ाएगा।
