पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर एक बार फिर हल्ला बोला है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी आखिरी सांस तक बंगाल में किसी भी डिटेंशन कैंप की इजाजत नहीं दूंगी। किसी भी अधिकारी को असम से बंगाल के लोगों को नोटिस भेजने का अधिकार नहीं है।
आगे उन्होंने करारा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की डबल इंजन वाली सरकार सोशल मीडिया के जरिए जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। आमतौर पर एसआईआर को पूरा होने में दो साल लगते हैं, लेकिन अब राजनीतिक फायदे के लिए इसे दो महीने का किया जा रहा है।
चुनाव आयोग पर भी लगाया आरोप
आगे उन्होंने चुनाव आयोग पर भी पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर एजेंसियां पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करेंगी, तो नतीजे समझ में आ सकते हैं। लेकिन हम लोकतंत्र बचाने के लिए यहां हैं।
विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए जानबूझकर रखा गया समय
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह आरोप भी लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का यह समय राज्य में विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए जानबूझकर रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पता है कि बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ), उप-मंडल अधिकारियों (एसडीओ) और बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) पर भारी दबाव है। लेकिन, विकास परियोजनाओं और एसआईआर पर काम, दोनों को जारी रखना होगा। बनर्जी ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य आम लोगों के मतदान के अधिकार को छीनना और चुनावों में भाजपा की मदद करना है।
इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने विमानन क्षेत्र में चल रहे संकट की तुलना एसआईआर प्रक्रिया से की। उन्होंने कहा कि दोनों ही खराब योजना का परिणाम हैं। पिछले सात दिनों से लोग टिकट होने के बावजूद हवाई जहाजों में सवार नहीं हो पा रहे हैं। यह एसआईआर की तरह ही गलत योजना के कारण है।
भाजपा का कार्यक्रम था, मैं कैसे जाती- ममता
इससे पहले, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सनातन संस्कृति संसद द्वारा आयोजित भगवद्गीता पाठ कार्यक्रम में न शामिल होने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कार्यक्रम था। अगर निष्पक्ष कार्यक्रम होता, तो मैं निश्चित रूप से वहां जाती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मैं ऐसे कार्यक्रम में कैसे शामिल हो सकती हूं, जिसमें भाजपा सीधे तौर पर शामिल है? मैं उन लोगों के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होती, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस से नफरत करते हैं और महात्मा गांधी के आदर्शों का पालन नहीं करते। मेरे बंगाल और मेरे शिक्षकों ने मुझे बनाया है। जो बंगाल का अपमान करते हैं और बांग्ला विरोधी है, मैं उनके साथ नहीं हूं।
बता दें कि भगवद्गीता पाठ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री बनर्जी और राज्यपाल सी वी आनंद बोस दोनों को निमंत्रण भेजा गया था। राज्यपाल बोस ने कार्यक्रम में भाग लिया, जबकि ममता बनर्जी अनुपस्थित रहीं थीं।
