मिडिल ईस्ट के युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कामयाबी मिली है। भारत आ रहा एलएनजी टैंकर 'दिशा' होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते को सुरक्षित पार करते हुए गुजरात के दहेज एलएनजी टर्मिनल पर पहुंच गया है। 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस से लदा यह जहाज ऐसे समय पर भारत पहुंचा है, जब मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
पहली लॉन्ग टर्म LNG खेप
देश की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी 'पेट्रोनेट एलएनजी' (Petronet LNG) को तीन महीने से अधिक लंबे इंतजार के बाद कतर से अपनी पहली लॉन्ग-टर्म लिक्विफाइड नैचुरल गैस की खेप मिली है।
माल्टा के झंडे वाला पेट्रोनेट का चार्टर्ड एलएनजी टैंकर 'दिशा' करीब 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर गुजरात के भरूच जिले में स्थित दहेज टर्मिनल पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। इस टर्मिनल की कुल क्षमता 22.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है। यह खेप 'कतर एनर्जी' द्वारा पेट्रोनेट एलएनजी के साथ हुए दीर्घकालिक अनुबंध के तहत सप्लाई की गई है।
110 दिनों से ठप थी कतर से सप्लाई
इस वर्ष अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण कतर से भारत को होने वाली एलएनजी की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई थी। इस समुद्री गतिरोध के चलते कतर से आने वाले दीर्घकालिक जहाजों की आवाजाही थम गई थी। गौरतलब है कि कतर भारत के एलएनजी आयात में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। रिकॉर्ड के अनुसार, 'दिशा' ही वह आखिरी जहाज था जिसने 1 मार्च 2026 को दहेज टर्मिनल पर कतर से आई लॉन्ग-टर्म एलएनजी खेप उतारी थी। इसके बाद मार्च, अप्रैल और मई के दौरान कतर से कोई भी दीर्घकालिक खेप भारत नहीं पहुंची। ऐसे में पूरे 110 दिनों के लंबे अंतराल के बाद यह पहली सफल आपूर्ति है।
होर्मुज से कैसे निकला जहाज?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद इस जहाज ने रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को सुरक्षित पार किया। कई हफ्तों के क्षेत्रीय तनाव और समुद्री अनिश्चितता के बाद, इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से गुजरने वाले शुरुआती वाणिज्यिक जहाजों में 'दिशा' शामिल हो गया है।
आपको बता दें कि इस जहाज को पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा चार्टर किया गया है, जबकि इसका संचालन 'शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (SCI) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है। कतर से इस खेप का सुरक्षित भारत पहुंचना देश के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा बूस्ट माना जा रहा है।
