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नवजोत सिंह सिद्धू दंपति को लीगल नोटिस जारी, जानें क्या है 850 करोड रुपये से जुड़ा मामला

Navjot Singh Sidhu: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और नेता नजवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने नवजोत सिंह सिद्धू दंपति को लीगल नोटिस जारी किया है। नवजोत सिंह सिद्धू ने हाल ही में बताया था कि उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने 4 स्टेज के कैंसर को हराया है।

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नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर

Legal notice issued to Navjot Singh Sidhu: नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी के खिलाफ लीगल नोटिस जारी हुआ है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने नवजोत सिंह सिद्धू दंपति को लीगल नोटिस जारी किया है। इसके तहत उन्हें कहा गया है कि वो (नवजोत सिंह सिद्धू दंपति) 7 दिनों के भीतर इलाज के डॉक्यूमेंट पेश करें तथा माफी मांगे अन्यथा 100 मिलियन डॉलर (850 करोड रुपए) का क्षतिपूर्ति दावा किया जाएगा।

सिद्धू दंपति को 850 करोड़ का लीगल नोटिस

छत्तीसगढ़ के सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉक्टर कुलदीप सोलंकी ने टाइम्स नाऊ नवभारत से बात करते हुए कहा कि मैं सिद्धू दंपति को 850 करोड़ का लीगल नोटिस भेजा है। डॉक्टर सोलंकी का कहना है नवजोत सिंह सिद्धू देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं। 4 स्टेज पर कैंसर आयुर्वेद पद्धति से ठीक हो सकता है, यह गलत है और उनको देश की जनता से माफी मांगना चाहिए। नवजोत सिंह सिद्धू के गलत जानकारी से देश की कई जिंदगियां खतरे में हो सकती है।

Navjot Singh Sidhu.

नवजोत सिंह सिद्धू दंपति के खिलाफ लीगल नोटिस

क्या है पूरा मामला?

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कई कॉमेडी शो में जज की भूमिका में रह चुके नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने हाल ही में 4 स्टेज के कैंसर को हराया है। ऐसी जानकारी सिद्धू ने खुद साझा की थी। उनके अनुसार नवजोत कौर सिद्धू को स्टेज 4 का ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ था। जिसके इलाज के लिए उन्होंने आयुर्वेद का सहारा लिया। नवजोत सिंह सिद्धू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ये दावा किया था।

सिद्धू ने ये बताया था कि उनकी पत्नी को अब डॉक्टर्स ने पूरी तरह कैंसर से मुक्त घोषित कर दिया है। आइए जानते हैं कैसी रही उनकी कैंसर के खिलाफ जंग और किस चीज के सहारे से मिली इस गंभीर लड़ाई में जीत। नवजोत सिंह सिद्धू की मानें तो उनकी पत्नी यानी नवजोत कौर सिद्धू को लगभग 2 साल पहले स्टेज 4 का ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ था। जिसके बाद डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना को केवल 3% बताया था। नवजोत सिंह सिद्धू ने बताया था कि इतनी कम संभावना के बाद भी हमने इस जानलेवा रोग को हराया। क्योंकि हमने एक बेहद अनुशासित लाइफस्टाइल को फॉलो किया और एक सख्त डाइट प्लान को अपनाया।

इंटरमिटेंट फास्टिंग का लिया सहारा

नवजोत सिंह सिद्धू की मानें तो कैंसर की इस जंग में उनकी पत्नी ने इंटरमिटेंट फास्टिंग का भी सहारा लिया। जिसमें उन्हें दिन की लास्ट मील शाम को 6-7 के बीच दी जाती थी। जिसके बाद अगले दिन उन्हें 10 बजे फिर से कुछ खाने को मिलता था। खाने के बीच आया ये 16 घंटे का गैप कैंसर सेल्स को खत्म करने में काफी सहायक साबित होता है। सिद्धू ने ऐसी ही कई जानकारी उस वक्त साझा की थी, जिसके बाद अब उन्हें लीगल नोटिस जारी किया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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