सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अच्छी खबर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) और सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स - CS(MA) रूल्स, 1944 के तहत गंभीर या लाइलाज बीमारियों से पीड़ित आश्रित बेटों और भाइयों के लिए उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़ी शर्तों में ढील दी है। नए नियम के तहत, गंभीर या लाइलाज बीमारियों से पीड़ित आश्रित बेटों और भाइयों को जीवन भर CGHS/मेडिकल अटेंडेंस की सुविधाएं मिलती रहेंगी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इन नियमों के दायरे में आने वाले आश्रित बेटे या भाई की शादी होने पर भी CGHS सुविधाएं बंद नहीं की जाएंगी। हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब वे तय की गई 'आश्रित होने की शर्तों' को पूरा करेंगे और सक्षम मेडिकल बोर्ड से इसकी जांच करवा लेंगे।
पहले क्या था नियम?
पहले के नियमों के तहत, अविवाहित आश्रित बेटा 25 साल की उम्र तक CGHS सुविधाओं के लिए पात्र था, जबकि स्थायी रूप से दिव्यांग अविवाहित बेटा जीवन भर के लिए CGHS सुविधाओं का पात्र था। इसी तरह, आश्रित भाई 18 साल की उम्र तक पात्र था, जबकि दिव्यांग आश्रित भाई के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं थी। इसी प्रकार, आश्रित बेटियां और बहनें भी CGHS सुविधाओं के लिए पात्र हैं, और तलाकशुदा/पति द्वारा छोड़ी गई/पति से अलग रह रही/विधवा बेटियां और बहनें भी CGHS सुविधाओं के लिए पात्र हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बदले हुए नियमों का मकसद ऐसी पुरानी, गंभीर, क्रिटिकल या लाइलाज बीमारियों को कवर करना है, जिनकी वजह से शरीर की कार्यक्षमता में भारी और लगातार कमी आती है या व्यक्ति अपनी आजीविका कमाने या आत्मनिर्भर रहने में असमर्थ हो जाता है।
नए नियमों के तहत कौन योग्य होगा?
योग्यता के नियमों को समझाते हुए, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि योग्यता का फैसला हर मामले के आधार पर किया जाएगा। इसमें बीमारी के पुराने/गंभीर/नाज़ुक या लाइलाज होने, रोजमर्रा की जिंदगी में कामकाज पर असर, आश्रित की कमाई करने या आत्मनिर्भर बनने की क्षमता और लगातार निर्भरता को ध्यान में रखा जाएगा। जिन मामलों में मरीज को कई अंगों से जुड़ी बीमारियां या जटिल मेडिकल स्थितियां हों, वहां संबंधित विशेषज्ञ क्लिनिकल स्थिति और कामकाज पर असर का आकलन करेंगे।
