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बूंद-बूंद पानी देकर बचाए थे टमाटर, महंगाई के बीच किसान को अपनी मेहनत सड़क पर फेंकनी पड़ी, आखिर क्यों?

Latur Farme Throws Tomatoes on Street: किसान ने बूंद-बूंद पानी देकर टमाटर की फसल को जिंदा रखा, लेकिन जब फसल तैयार हुई तो बाजार में टमाटर का भाव इतना गिर गया कि एक कैरेट के सिर्फ सौ रुपये मिलने लगे।

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लातूर में टमाटर के दाम गिरे, किसान परेशान

Latur Farmers News Today: किसानों ने कर्ज लेकर फसल उगाई, हजारों रुपये खर्च कर टैंकर से पानी दिया, टमाटर तो बच गए, लेकिन किसान की उम्मीदें मर गईं। इसके बाद किसान ने सड़क पर टमाटर फेंक दिए। ये कहानी एक किसान के टूटे हुए सपनों की है। लातूर जिले के दापक्याल गांव में किसान मैनोद्दीन शेख ने ब्याज पर पैसे लेकर टमाटर की खेती की थी। जिले में बारिश नहीं हुई, तो फसल को बचाने के लिए हजारों रुपये खर्च कर टैंकरों से पानी लाया गया।

बूंद-बूंद पानी देकर टमाटर की फसल को जिंदा रखा

किसान ने बूंद-बूंद पानी देकर टमाटर की फसल को जिंदा रखा, लेकिन जब फसल तैयार हुई तो बाजार में टमाटर का भाव इतना गिर गया कि एक कैरेट के सिर्फ सौ रुपये मिलने लगे। हालात ऐसे हो गए कि टमाटर तोड़ने, मजदूरी देने और बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी निकलना मुश्किल हो गया। आखिरकार मजबूर किसान ने अपनी मेहनत और फसल को खेत और सड़क पर ही फेंक दिया।

जिस फसल को किसान ने अपने बच्चों की तरह पाला, आज उसी फसल को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते देख रहा है। टमाटर जिंदा रहे, लेकिन किसान की उम्मीदों का भाव शून्य हो गया। अब सवाल यह है कि आखिर उस किसान की मदद कौन करेगा, जिसने कर्ज लेकर खेती की, पानी खरीदकर फसल बचाई और आज अपनी पूरी मेहनत को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हो गया?

टमाटर के दाम क्यों गिरे?

मानसून के दौरान और उसके बाद की अनुकूल स्थिति में लातूर और आसपास के इलाकों से टमाटर की फसल एक साथ मंडियों में पहुंची। सप्लाई मांग की तुलना में बहुत अधिक हो गई। थोक मंडियों में आवक अत्यधिक होने के कारण टमाटर के दाम इतने नीचे चले गए हैं (कई बार रुपये 2 से रुपये 5 प्रति किलो) कि किसानों को फसल की तुड़ाई, क्रेट की पैकिंग और मंडी तक ट्रांसपोर्ट का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। टमाटर की शेल्फ लाइफ बहुत कम होती है और कोल्ड स्टोरेज बुनियादी ढांचे की कमी के कारण किसान फसल को ज्यादा दिन रोक नहीं सकते, जिससे उन्हें मजबूरन कौड़ियों के भाव माल बेचना पड़ता है।

प्याज की किल्लत, बढ़ रही कीमत

वहीं, पिछले मौसम में अनियमित बारिश, अत्यधिक गर्मी और नमी में बदलाव के कारण साठ कर रखे गए (रबी) प्याज का बड़ा हिस्सा सड़ गया या खराब हो गया। मानसून में देरी या असमान बारिश के कारण नई खरीफ प्याज की बुआई और फसल आने में समय लग रहा है। पुरानी जमा पूंजी (स्टॉक) कम होने और नई फसल के बाजार में देर से आने के कारण मंडियों में प्याज की आवक घटी है, जिससे थोक और खुदरा बाजारों में किल्लत व महंगाई देखने को मिल रही है।

(लातूर से आसिफ पटेल इनपुट)

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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