Street Vendors in Connaught Place News Today: दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि कनॉट प्लेस और कनॉट सर्कस इलाका ‘नो वेंडिंग/नो स्क्वाटिंग जोन’ है। जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने यहां रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लोगों का सामान हटाने की नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की कार्रवाई को सही ठहराते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट की धारा 12 के तहत जिस इलाके को ‘नो वेंडिंग जोन’ घोषित किया गया है, वहां कोई स्ट्रीट वेंडर कारोबार नहीं कर सकता।
याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि वे पुराने लाइसेंसधारी/वेंडर हैं और उनका नाम 628 अनधिकृत कब्जाधारियों की सूची में शामिल था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस सूची में नाम होना अपने आप में तहबाजारी लाइसेंस या वेंडिंग का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपने किसी पुराने वैध अधिकार को साबित नहीं कर सके।
अदालत के सामने यह भी बताया गया कि उनका सामान नवंबर 2022 में ‘नो वेंडिंग जोन’ में वेंडिंग करने के कारण हटाया गया था। हाईकोर्ट ने 2021 के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कनॉट प्लेस और कनॉट सर्कस को ‘नो वेंडिंग/नो हॉकिंग जोन’ माना गया था और केवल 80 चिन्हित वेंडरों को वहां गतिविधि की अनुमति थी। मौजूदा याचिकाकर्ता इन 80 लोगों में शामिल नहीं थे। इसके बाद कोर्ट ने NDMC की कार्रवाई में कोई गलती नहीं पाई और याचिकाओं को खारिज करते हुए अवमानना नोटिस भी खत्म कर दिया।
दिल्ली का कनॉट प्लेस (राजीव चौक और इंदिरा चौक) देश के सबसे प्रमुख व्यावसायिक, ऐतिहासिक और हेरिटेज सेंटर्स में से एक है। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) की नीति और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकृत योजनाओं के तहत पूरे कनॉट प्लेस इलाके को 'नो हॉकिंग एंड नो वेंडिंग जोन' घोषित किया गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े आदेश
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कनॉट प्लेस की क्षमता सीमित है। सुरक्षा, सफाई और आपातकालीन वाहनों (जैसे फायर ब्रिगेड) की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए यहां अवैध अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस रखा जाए। कोर्ट के आदेशानुसार केवल 80 के करीब पुराने वैध तहबाजारी लाइसेंस धारकों को छोड़कर अन्य किसी भी नए या अवैध विक्रेता को यहां बैठने की अनुमति नहीं है।
