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Land for Job case में बढ़ी लालू परिवार की मुश्किल, दिल्ली-नोएडा समेत नौ ठिकानों पर CBI की ताबड़तोड़ छापेमारी

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 16, 2023, 01:18 PM IST

Land for Job case: नौकरी के बदले जमीन मामले में सीबीआई ने मंगलवार को गुरुग्राम, रेवाड़ी, नोएडा तथा दिल्ली समेत नौ ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी राजद विधायक किरण देवी और राज्यसभा सदस्य प्रेम चंद गुप्ता से जुड़े ठिकानों पर की गई है।

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जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू यादव की बढ़ी मुश्किल

Photo : BCCL

Land for Job case: रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू परिवार की मुश्किल बढ़ती हुई नजर आ रही है। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) इस मामले में राजद सुप्रीमो के खिलाफ अपना शिकंजा धीरे-धीरे कस रही है। मंगलवार को जांच एजेंसी की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई।

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने इस मामले में मंगलवार को गुरुग्राम, रेवाड़ी, नोएडा तथा दिल्ली समेत नौ ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी राजद विधायक किरण देवी और राज्यसभा सदस्य प्रेम चंद गुप्ता से जुड़े ठिकानों पर की गई है।

घोटाले में सामने आई दोनों की संलिप्तता

अधिकारियों ने बताया, रलवे में नौकरी के बदले जमीन कथित घोटाले में दोनों राजद नेताओं की भूमिका सामने आई है, जिसके बाद छापेमारी की कार्रवाई की है। अधिकारियों के मुताबिक, बिहार के आरा व पटना में किरण देवी और उनके पति अरुण सिंह के परिसरों और गुरुग्राम, रेवाड़ी, नोएडा तथा दिल्ली में गुप्ता के परिसरों पर छापेमारी की गई।

लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए हुआ था घोटाला

यह मामला राजद के प्रमुख लालू प्रसाद के 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहने के दौरान कथित तौर पर उपहार में दी गई या बेची गई जमीन के बदले रेलवे में की गई नियुक्तियों से जुड़ा है। केंद्रीय रेलवे में भर्ती के नियमों तथा प्रक्रियाओं का कथित तौर पर उल्लंघन कर नियुक्तियां की गई थीं। आरोप है कि नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक नोटिस जारी नहीं किया गया, लेकिन पटना के कुछ निवासियों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर तथा हाजीपुर में स्थित विभिन्न जोनल रेलवे में स्थानापन्न (सब्स्टिट्यूट) के रूप में नियुक्त किया गया।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

बता दें, इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। सीबीआई ने लालू यादव व उनकी पत्नी राबड़ी देवी के आवास पर पूछताछ की थी। सीबीआई की इस कार्रवाई की राजद लगातार विरोध कर रही है। राजद का कहना है कि यह कार्रवाई बदले की राजनीति से प्रेरित है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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