Arvind Kejriwal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को गांधीनगर के अडालज में मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ किया। इस दौरान पीएम मोदी बच्चों के साथ स्मार्ट क्लास (Smart Class) में बैठे और उन्होंने डिजिटल ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाई को देखा। पीएम मोदी ने कुछ देर स्मार्ट क्लास का जायजा लिया और एक छात्र की ओर से बताई गई बातों को ध्यान से सुना।
बच्चों के साथ पीएम मोदी की फोटो वायरल
केजरीवाल ने पीएम मोदी पर सिसोदिया की कॉपी करने का लगाया आरोप!
बाद में बच्चों के साथ पीएम मोदी की फोटो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो गई। खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी की बच्चों के साथ बैठी हुई फोटो ट्विटर पर शेयर की है, लेकिन साथ ही उसी फोटो में उन्होंने मनीष सिसोदिया की भी फोटो शेयर की, जिसमें वह भी बच्चों के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। भले ही अरविंद केजरीवाल ने फोटो के कैप्शन में कुछ नहीं लिखा, लेकिन वह ये बताना चाह रहे थे पीएम मोदी मनीष सिसोदिया को कॉपी कर रहे थे। वहीं सोशल मीडिया में फोटो को लेकर लोग अलग-अलग रियक्शन दे रहे हैं
अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि आज देश की सभी पार्टियों और नेताओं को शिक्षा और स्कूलों की बात करनी पड़ रही है। ये हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं उम्मीद करता हूं कि केवल चुनाव के दौरान शिक्षा याद ना आए। सभी सरकारें मिलकर महज 5 साल में सभी सरकारी स्कूलों को शानदार बना सकते हैं। साथ ही कहा कि पीएम सर, हमने दिल्ली में शिक्षा में शानदार काम किया है। 5 साल में दिल्ली के सारे सरकारी स्कूल शानदार बना दिए। पूरे देश के स्कूल 5 साल में ठीक हो सकते हैं। हमें अनुभव है। आप हमें पूरी तरह इसके लिए इस्तेमाल कीजिए प्लीज। मिलके करते हैं ना। देश के लिए।
वहीं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि मोदी जी आज पहली बार गुजरात के बच्चों के साथ स्कूल जाकर बैठे। 27 साल पहले ये शुरू कर दिया होता तो आज गुजरात के हरेक बच्चे को, शहर से लेकर गांव तक के हर बच्चे को, शानदार शिक्षा मिल रही होती। दिल्ली में 5 साल में हो सकता है तो गुजरात में तो बीजेपी 27 साल से सरकार में है, लेकिन बीजेपी के 27 साल के शासन में गुजरात के सरकारी स्कूलों का हाल ये है - 48,000 स्कूलों में से 32,000 की हालत एकदम खस्ताहाल है, इनमें भी 18,000 में तो कमरे तक नहीं है। टीचर नहीं है। एक करोड़ बच्चों में से अधिकतर का भविष्य अंधेरे में है इन स्कूलों में।
