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राहुल गांधी नागरिकता मामले में न्यायाधीश ने सुनवाई से खुद को किया अलग, जानें क्या है वजह

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने 17 अप्रैल को एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

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राहुल गांधी (फाइल फोटो)

Photo : Twitter

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कथित दोहरी नागरिकता मामले में उपजी स्थिति से व्यथित न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने सोमवार को खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया।न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वह इस मामले की सुनवाई के लिए किसी अन्य न्यायाधीश को नामित कर दें।

हालांकि, न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने यह स्वीकार किया कि 17 अप्रैल को फैसला सुनाने से पहले उन्हें इस मामले में आरोपी राहुल गांधी को नोटिस जारी करना चाहिए था।न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने सभी पक्षों के वकीलों को फटकार लगाई कि उन्होंने उनके सामने सही कानूनी स्थिति पेश नहीं की।न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने 17 अप्रैल को एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

हालांकि, जब 18 अप्रैल को यह आदेश उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया तो उसमें बताया गया था कि आदेश टाइप होने और उस पर हस्ताक्षर होने से पहले न्यायाधीश को पता चला कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक अहम फैसले के अनुसार इस मुद्दे पर कोई भी फैसला सुनाने से पहले राहुल गांधी को नोटिस जारी करना अनिवार्य है।

अगली सुनवाई 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध

इसके बाद न्यायाधीश ने आदेश पर हस्ताक्षर करने के बजाय राहुल गांधी को नोटिस जारी करने के मुद्दे पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दी।न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने सोमवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले राहुल गांधी को नोटिस जारी करना अनिवार्य था।न्यायमूर्ति विद्यार्थी सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. शिशिर विग्नेश द्वारा सोशल मीडिया पर किये गई पोस्ट से नाराज दिखे।

'मुझे इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करना ही उचित लगता है'

न्यायमूर्ति ने कहा, '17 अप्रैल को आदेश पारित होने के बाद याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए संदेश इस अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के समान हैं, लिहाजा इन बातों को ध्यान में रखते हुए मुझे इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करना ही उचित लगता है।' न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत के बारे में उचित कानूनी सहयोग नहीं दिये जाने का जिक्र करते हुए टिप्पणी की, 'मुझे यह देखकर दुख हुआ कि इस मामले में पेश हुए वकील अदालत को निष्पक्ष तरीके से सहायता प्रदान करने के अपने कर्तव्य को निभाने में विफल रहे हैं।'

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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