वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन से चार दिनों के भीतर चांद पर शिव-शक्ति प्वाइंटर पर अंधेरा छा जाएगा, जिसके बाद चंद्रयान-3 के नींद से जागने की उम्मीदें भी खत्म हो जाएंगी। हालांकि, इसरो को चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल से उम्मीदें बनी रहेंगी।
प्रोपल्शन मॉड्यूल भेज रहा बहुत सारा डेटा
इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-3 का प्रोपल्शन मॉड्यूल लगभग 58 दिनों से चांद के चारों ओर चक्कर लगा रहा है। अभी तक इस मॉड्यूल ने बहुत सारा डेटा इसरो को भेजा है। इसरो को उम्मीद है कि यह पहले की तरह काम करता रहेगा और आगे भी इसरो के कमांड सेंटर को अपना डेटा भेजता रहेगा। दरअसल, इस प्रोपल्शन मॉड्यूल में SHAPE नामक यंत्र लगा हुआ है, जो बेहद अच्छी तरह काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी यह कम से कम चार से पांच महीने और काम करता रहेगा।
प्रोपल्शन मॉड्यूल का था ये काम
बता दें, चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल का काम विक्रम लैंडर को चांद की नजदीकी कक्षा में डालना था और इसके बाद उससे अलग होकर चांद के चक्कर लगाना था। इसने यह काम अच्छे से किया और लगातार चांद के चक्कर लगाते हुए डेटा इसरो सेंटर को भेजा। इस मॉड्यूल में लगे शेप यंत्र का काम छोटे ग्रहों के साथ-साथ एक्सोप्लैनेट्स की खोज खोज करना था। बता दें, इसरो के मिशन चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर इतिहास रच दिया था। इसमें अभी तक भारत को छोड़कर कोई अन्य देश कामयाब नहीं हो सका है।
