ईशा (Isha) ने विश्व पर्यावरण दिवस (World Enviroment Day) पर तमिलनाडु और कर्नाटक में वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियानों की शुरुआत की है। वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य कावेरी कॉलिंग अभियान के हिस्से के तौर किसानों को ‘ट्री बेस्ड एग्रीकल्चर’ करने के लिए प्रोत्साहित करना है जिससे किसानों की आय बढ़े और साथ ही साथ कावेरी नदी को पुनर्जीवित किया जा सके।
इस विशेष अवसर पर सद्गुरु ने एक संदेश में कहा, 'यूज़ एंड थ्रो' की मानसिकता को समाप्त करना केवल प्रदूषण को कम करने के बारे में नहीं है, यह सभी सृजन के प्रति सम्मान के बारे में है। सब कुछ जीवित पृथ्वी से ही आता है। आइए हम इसका जिम्मेदारी से उपयोग करें।'
वृक्षारोपण अभियानों का आयोजन तमिलनाडु और पुदुच्चेरी के सभी जिलों में 140 किसानों की जमीनों पर किया गया था, जहां एक दिन में 1.6 लाख पेड़ लगाए गए। यह आंदोलन किसानों को मूल्यवान लकड़ी के पेड़ लगाने में सहायता कर रहा है, जैसे कि सागौन, रेड सैंडलवुड, बरगद, नीम, महोगनी और रोजवुड, जो उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने के साथ-साथ कावेरी नदी को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण हैं। इन कार्यक्रमों में सांसद, विधायक, महापौर अन्य प्रमुख लोग और आम जनता ने शामिल होकर अभियान को अपना समर्थन प्रदान किया।

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कोयंबटूर के पोलाची नगर में, सांसद के श्री के शन्मुगसुंदरम ने 'प्लास्टिक मुक्त नोयल नदी' अभियान का उद्घाटन किया। इसके तहत, ईशा ने तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर नोयल नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू किया, जो कोयंबटूर और तिरुपुर सहित चार जिलों के लिए मुख्य जल स्रोत है। ईशा को नोयल नदी के पहले 4 किलोमीटर से कचरा हटाने का काम सौंपा गया हैं।
ईशा संस्कृति और ईशा होम स्कूल के उत्साही छात्रों ने मिलकर नदी की सफाई का कार्य शुरू किया। छात्रों की संलग्नता और समर्पण को देख कर, माननीय मंत्री ने पर्यावरण की संरक्षण में उनकी प्रयासों की सराहना की। विश्व पर्यावरण दिवस की भावना को आत्मसात् करते हुए, सेव सॉइल स्वयंसेवकों ने मरीना बीच, चेन्नई में स्वच्छता अभियान का आयोजन किया ताकि प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त किया जा सके। उदाहरण के रूप में दर्शाते हुए, स्वयंसेवकों ने मरीना बीच से प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा किया और विशुद्ध समुद्री पर्यावरण को संरक्षित रखने का संदेश दिया।

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तमिलनाडु वन विभाग के साथ 'मिट्टी बचाओ' स्वयंसेवकों ने पवित्र वेल्लियंगिरी पर्वतों पर ट्रेकर्स द्वारा छोड़े गए प्लास्टिक बोतलें, कवर, और अन्य कचरे को भी इकट्ठा किया। कोयंबटूर में स्थित इन पर्वतों का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है, जिससे एक बड़ी संख्या में भक्त आकर्षित होते हैं। इसलिए, पर्वतों के शुद्ध पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए स्वच्छता अभियानों का आयोजन आवश्यक हो जाता है।
सद्गुरु के नेतृत्व में मिट्टी बचाओ अभियान नागरिक समर्थन को सक्रिय कर रहा है और दुनिया भर की सरकारों को दुनिया की मरती हुई मिट्टी के गंभीर विषय को संबोधित करने वाली नीतियां बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। दुनिया की 52% कृषि मिट्टी पहले से ही क्षयित हो चुकी है, इसलिए 'सेव सॉइल मूवमेंट' का सुझाव है कि कृषि मिट्टियों में क्षेत्रीय स्थितियों के आधार पर कम से कम 3-6% साइल आर्गेनिक मैटर (एसओएम) होना चाहिए। ईशा ने 7 मई 2023 को तमिलनाडु वन विभाग के सहयोग से तेन्कैलाया भक्ति पेरवाई के माध्यम से अपने वार्षिक पर्यावरण स्वच्छता अभियान की भी शुरुआत की।

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कर्नाटक में नवनिर्वाचित चिक्कबल्लापुर एमएलए प्रदीप ईश्वर ने ईशा की 'ग्रीन चिक्कबल्लापुर' पेड़ लगाने की पहल के तहत बेंगलुरु के सद्गुरु सन्निधि, आदियोगी में एक पौधे को लगाया। इस पहल के तहत 2023 में चिक्कबल्लापुर जिले में 10,000 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। कर्नाटक सरकार के सबसे कम उम्र के एमएलए ने कहा कि उन्हें ईशा द्वारा उठाए गए पहलों पर गर्व है और वे सभी विकास के कार्यों के प्रति अपूर्व समर्थन का वादा किया। 'मिट्टी बचाओ' स्वयंसेवक और स्थानीय ग्रामीणों ने सद्गुरु सन्निधि पर पौधे लगाने में अपना दिन बिताया।
ईशा ने चिक्काबल्लापुर के थिप्पनहल्ली और अवलागुर्की गांवों में एक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया, जिसमें ईशा द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के दौरान इक्षा व्यक्त करने वाले प्रत्येक किसान को पांच फल देने वाले पौधे मुफ्त में दिए गए। किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे और इन आयोजनों पर पौधे प्राप्त किए।
2020 से सरकार ने कर्नाटक में 9 कावेरी नदी के बेसिन जिलों में 41,000 से अधिक किसानों को 24 मिलियन पौधों का वितरण किया है। कावेरी कॉलिंग टीम ने कर्नाटक सरकार के साथ 1,800 से अधिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनमानस को जागरूक करने का काम किया है और कावेरी कॉलिंग किसान हेल्पलाइन और व्हाट्सप्प समूहों के माध्यम से 51,500 से अधिक किसानों को मदद प्रदान किया है।
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