Lal Quila Blast: दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए कार बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर एक बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। 10 नवंबर 2025 को हुए इस धमाके ने देश की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, यह हमला एक हाई-इंटेंसिटी व्हीकल-बोर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) के जरिए अंजाम दिया गया था।
NIA की चार्जशीट में कितने आरोपी?
एनआईए ने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में 10 आरोपियों को नामजद किया है। एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपी आतंकी संगठन “अंसार गजवत-उल-हिंद” से जुड़े थे, जिसे अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) का सहयोगी संगठन बताया गया है। गृह मंत्रालय पहले ही जून 2018 में एक्यूआईएस और उससे जुड़े सभी संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है।
लाल किला बम धमाके का मुख्य आरोपी कौन?
चार्जशीट में मुख्य आरोपी के तौर पर पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी का नाम शामिल है, जिसकी विस्फोट में मौत हो चुकी है। एनआईए के मुताबिक, वह फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका था। एजेंसी ने अदालत से उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। अन्य आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजामिल शकील, डॉ. अदील अहमद रादर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं। एनआईए का दावा है कि जांच के दौरान सामने आया कि इनमें से कई आरोपी पेशे से डॉक्टर और शिक्षित पेशेवर थे, लेकिन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गए। एजेंसी के मुताबिक, 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के दौरान इन लोगों ने “अंसार गजवत-उल-हिंद इंटरिम” नाम से संगठन को दोबारा सक्रिय किया था। यह कदम कथित तौर पर अफगानिस्तान पहुंचने की असफल कोशिश के बाद उठाया गया।
क्या है ऑपरेशन हेवेनली हिंद?
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने “ऑपरेशन हेवेनली हिंद” नामक साजिश तैयार की थी, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकना और शरीयत आधारित शासन स्थापित करना था। एनआईए का कहना है कि इसके लिए नए सदस्यों की भर्ती, कट्टरपंथी प्रचार, हथियारों का संग्रह और विस्फोटक तैयार करने का काम संगठित तरीके से किया गया।
कौन सा विस्फोटक किया था तैयार?
चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (टीएटीपी) नामक अत्यधिक खतरनाक विस्फोटक तैयार किया था। यह वही विस्फोटक है जिसका इस्तेमाल कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों में भी किया जा चुका है। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने बाजार में आसानी से उपलब्ध रसायनों का इस्तेमाल कर गुप्त रूप से इस विस्फोटक को तैयार किया और उसके परीक्षण भी किए।
कार के साथ-साथ रॉकेट और ड्रोन का भी इस्तेमाल
एनआईए ने कहा है कि आरोपियों ने केवल कार बम तक खुद को सीमित नहीं रखा था, बल्कि रॉकेट और ड्रोन आधारित आईईडी पर भी प्रयोग किए जा रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए एके-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौल जैसे हथियार अवैध तरीके से जुटाए गए थे।
कौन हुई मृत आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान?
एजेंसी ने बताया कि इस मामले की जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर तक फैली। चार्जशीट में 588 मौखिक गवाहियों, 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है। फॉरेंसिक जांच, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और वॉयस एनालिसिस के जरिए मृत आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान की पुष्टि की गई। एनआईए का यह भी दावा है कि आरोपियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से विशेष लैब उपकरण, इलेक्ट्रिक सर्किट, स्विच और विस्फोटक सामग्री जुटाई थी। एजेंसी के अनुसार, उनका नेटवर्क देश के दूसरे हिस्सों में भी फैलने की योजना बना रहा था, जिसे समय रहते ध्वस्त कर दिया गया।
अभी भी कुछ संदिग्ध की तलाश जारी
अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुछ अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। एनआईए ने कहा है कि फरार आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
