Indian Air Force Helicopters: भारत की युद्ध क्षमताओं को बढ़ावा मिला है। इंडियन आर्मी को अमेरिका से अपने तीन बचे हुए अपाचे AH-64 अटैक हेलीकॉप्टर (Apache AH-64 attack helicopters) मिल गए हैं। पश्चिमी सीमा पर भारत की हमला करने की क्षमताओं में इससे महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। ये हेलीकॉप्टर नई दिल्ली के पास हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर एक एंटोनोव-124 हेवी-लिफ्ट विमान से पहुंचे। इस डिलीवरी के साथ फरवरी 2020 में इन छह एडवांस्ड 'फ्लाइंग टैंक' के लिए साइन की गई 5,691 करोड़ रुपये की डील पूरी हो गई है। यह युद्ध के मैदान पर हावी होने की आर्मी एविएशन कॉर्प्स की क्षमता में एक बड़ा बदलाव है।
इस आखिरी बैच के आने से डील के अनुसार, आर्मी के पास कुल 6 अपाचे पहुंच गए हैं। यह नए तीनों हेलीकॉप्टर राजस्थान के जोधपुर में स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में शामिल होंगे। पाकिस्तान बॉर्डर के रणनीतिक रूप से पास तैनात ये हेलीकॉप्टर खास तौर पर रेगिस्तानी लड़ाई के लिए तैयार किए गए हैं।
आधुनिक युद्ध में एक जानलेवा हथियार
AH-64E अपाचे को दुनिया का सबसे एडवांस्ड मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर माना जाता है। ये टैंक किसी भी आर्मी की बहुत बड़ी ताकत है, जिन्हें सटीक हमलों और हाई-इंटेंसिटी आर्म्ड लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया है। इन्हें हवा में उड़ने वाला टैंक इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे स्टिंगर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, हेलफायर लॉन्गबो हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों, बंदूकों और रॉकेट से लैस हैं।
Apache क्यों जरूरी?
भारत ने फरवरी 2020 में अमेरिका के साथ 5,691 करोड़ रुपये की डील में सेना के लिए छह हेवी-ड्यूटी अपाचे हेलीकॉप्टर का ऑर्डर दिया था। डील में पहले तीन हेलीकॉप्टर जुलाई में डिलीवर होने थे। हालांकि, सप्लाई चेन में काफी देरी हुई।
अब कुल छह अपाचे आ गए हैं और बता दें कि भारतीय वायु सेना पहले से ही 22 अपाचे चला रही है। तो ये 6 मशीन भी उन 22 ऐसे हेलीकॉप्टरों में शामिल होंगी जिन्हें IAF ने सितंबर 2015 में अमेरिका के साथ 13,952 करोड़ रुपये की डील के तहत 2019 और 2020 के बीच शामिल किया था।
सेना के अपाचे हेलीकॉप्टरों को जोधपुर में तैनात किया जाएगा, जहां पिछले साल मार्च में पाकिस्तान के साथ पश्चिमी मोर्चे की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्क्वाड्रन बनाया गया।
भारत को असली ताकत कब मिलेगी?
काफी समय से अटके हुए इन अमेरिकी एयरक्राफ्ट को शामिल करने का मकसद भारत के युद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद कमियों को पूरा करना था। हालांकि, विशेषज्ञों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भारत को असली बढ़ावा तब मिलेगा जब सेना और IAF को 2028 से 156 स्वदेशी 'प्रचंड' हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर मिलना शुरू हो जाएंगे। फिलहाल ये उम्मीद लगाई जा रही है।
HAL को इस साल मार्च में हुए 62,700 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 2028-2033 के टाइमफ्रेम में प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर – सेना के लिए 90 और IAF के लिए 66 – डिलीवर करने हैं। ये एयरक्राफ्ट 20mm टरेट गन, 70mm रॉकेट सिस्टम और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस होंगे, जिनका इस्तेमाल चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर पूर्वी लद्दाख और सियाचिन ग्लेशियर जैसे ऊंचे इलाकों में आक्रामक ऑपरेशन और सटीक हमलों के लिए किया जाएगा।
