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INDIA नहीं BHARAT : सरकार को सबसे पहले किसने सुझाया 'भारत' नाम? क्या कहता है संविधान और सुप्रीम कोर्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 5, 2023, 04:31 PM IST

INDIA vs BHARAT: देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत किए जाने का मुद्दा अचानक से सामने नहीं आया है। इसकी मांग लंबे समय से उठ रही है। सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर दो बार याचिका भी दाखिल हुई है, जिन्हें खारिज कर दिया गया था।

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भारत vs इंडिया विवाद

Photo : Twitter

INDIA vs BHARAT: संसद के विशेष सत्र और जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले देश में एक नया सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। अटकलें हैं कि सरकार विशेष सत्र के दौरान संविधान से 'INDIA' शब्द को हटाने के लिए बिल ला सकती है। इस बीच राष्ट्रपति भवन की ओर से जी-20 समिट के दौरान रात्रिभोज के लिए भेजे गए निमंत्रण पत्र पर 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखे जाने पर कांग्रेस भड़क गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने चुपके से देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत कर दिया है। उन्होंने कहा, यह संविधान के खिलाफ है। अब 'राज्यों का संघ' खतरे में है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि एकाएक यह बवाल कैसे खड़ा हो गया? सरकार नाम बदलने पर कब से विचार कर रही है? सबसे पहले सरकार को यह सुझाव किसने दिया और संविधान और सुप्रीम कोर्ट में INDIA और BHARAT को लेकर क्या कहा गया है? आइए जानते हैं...

एकाएक नहीं हुआ विवाद

बता दें, देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत किए जाने का मुद्दा अचानक से सामने नहीं आया है। इसकी मांग लंबे समय से उठ रही है। हालांकि, बीते कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार आधिकारिक रूप से देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत कर सकती है। बता दें, इससे पहले यह मसला सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया जा चुका है।

सरकार को किसने सुझाया नाम

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर विपक्षी दलों ने गठबंधन बनाया है और इसका नाम INDIA रखा है। इसके बाद से देश में INDIA नाम की सियासत ने जोर पकड़ लिया है। इसके बाद इसी महीने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में लोगों से अपील की थी कि वे इंडिया की जगह भारत नाम का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा था कि सदियों से देश नाम भारत ही है, इंडिया नहीं।

संविधान में क्या कहा गया है?

संविधान के अनुच्छेद 1 में कहा गया है कि "इंडिया, जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा।" यहां एक बात समझना जरूरी है कि संविधान का अनुच्छेद 1 'इंडिया' और 'भारत' दोनों नामों को आधिकारिक मान्यता देता है। ऐसे में यदि सरकार केवल 'भारत' को आधिकारिक नाम बनाने का निर्णय लेती है, तो उन्हें संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन करने के लिए एक विधेयक पेश करना होगा। संविधान का अनुच्छेद 368 संविधान को साधारण बहुमत संशोधन या विशेष बहुमत संशोधन के माध्यम से संशोधित करने की अनुमति देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर क्या कहा?

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2016 में, सुप्रीम कोर्ट में देश का नाम इंडिया की जगह भारत किए जाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल कर दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके चार साल बाद यानी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर इंडिया से भारत नाम बदलने की मांग वाली इसी तरह की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। उस समय न्यायालय ने सुझाव दिया था कि याचिका को एक अभ्यावेदन में परिवर्तित किया जा सकता है और उचित निर्णय के लिए केंद्र सरकार को भेजा जा सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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