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क्यों तप रहा है पूरा उत्तर और मध्य भारत? ब्रह्मपुरी में 47.2°C के पीछे क्या है वजह, कब मिलेगी राहत?

देश के कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहा। आईएमडी के मुताबिक महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी देश का सबसे गर्म स्थान रहा।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस बार गर्मी इतनी खतरनाक क्यों हो गई है, कौन-से मौसमीय कारक इसके पीछे काम कर रहे हैं और क्या आने वाले दिनों में राहत मिलने वाली है?

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हीटवेव का कहर

Photo : iStock

मई का आखिरी सप्ताह आते-आते देश का बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी रविवार को 47.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म शहर बन गया। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य भारत के कई हिस्सों में तापमान लगातार 45 डिग्री के आसपास बना हुआ है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस बार गर्मी इतनी खतरनाक क्यों हो गई है, कौन-से मौसमीय कारक इसके पीछे काम कर रहे हैं और क्या आने वाले दिनों में राहत मिलने वाली है?

आखिर इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ रही है?

आईएमडी के मुताबिक, इस समय उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में “हीट डोम” जैसी स्थिति बनी हुई है। इसका मतलब है कि वातावरण के ऊपरी हिस्से में गर्म और शुष्क हवा का दबाव क्षेत्र बन गया है, जो नीचे की गर्म हवा को बाहर निकलने नहीं दे रहा। इससे जमीन लगातार गर्म होती जा रही है।

हीटवेव और गर्मी की लहर

हीटवेव और गर्मी की लहर

इसके साथ ही कई राज्यों में आसमान साफ है और बादल लगभग नहीं हैं। जब बादल नहीं होते तो सूरज की सीधी किरणें जमीन को अधिक गर्म करती हैं। राजस्थान, विदर्भ, बुंदेलखंड और दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में यही स्थिति बनी हुई है।

एक बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की अनुपस्थिति भी है। आमतौर पर मई के दौरान उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होकर तेज हवाएं, बादल या हल्की बारिश लाते हैं, जिससे तापमान कुछ कम होता है। लेकिन पिछले कई दिनों से ऐसा कोई प्रभावी सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ, इसलिए गर्मी लगातार बढ़ती गई।

ब्रह्मपुरी ही सबसे गर्म क्यों बना?

ब्रह्मपुरी महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित है, जो पहले से ही देश के सबसे गर्म इलाकों में गिना जाता है। यहां की भौगोलिक स्थिति, कम नमी और सूखी हवाएं तापमान तेजी से बढ़ाती हैं।

विदर्भ क्षेत्र में इस समय जमीन बेहद शुष्क है और हवा में नमी बहुत कम है। इससे सूरज की गर्मी सीधे सतह को तपाती है। यही वजह है कि नागपुर, चंद्रपुर और वर्धा जैसे शहर भी 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गए।

दिल्ली से राजस्थान तक क्यों बढ़ा खतरा?

वहीं, राजधानी दिल्ली में तापमान 43-44 डिग्री के बीच बना हुआ है, लेकिन समस्या सिर्फ अधिकतम तापमान नहीं है। रात का तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है। इसका मतलब है कि लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही।

राजस्थान की बात करें तो वहां हालात और ज्यादा गंभीर हैं। श्री गंगानगर, बीकानेर, फलोदी और चूरू जैसे इलाकों में रेगिस्तानी गर्म हवाएं लगातार चल रही हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी राजस्थान में तापमान 46-47 डिग्री तक जा सकता है।

वहीं यूपी के बांदा, प्रयागराज और झांसी जैसे शहरों में भी गर्म हवाओं ने हालात कठिन बना दिए हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखी जमीन और कम हरियाली गर्मी को और बढ़ा रही है।

लू आखिर होती क्या है?

जब किसी क्षेत्र में तापमान सामान्य से बहुत अधिक हो जाए और गर्म, शुष्क हवाएं चलें, तो उसे “लू” कहा जाता है। भारत में मैदानी इलाकों में आमतौर पर 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान और सामान्य से 4.5 डिग्री ज्यादा बढ़ोतरी होने पर हीटवेव घोषित की जाती है। अगर तापमान 45 डिग्री या उससे अधिक पहुंच जाए तो उसे गंभीर हीटवेव माना जाता है। यही स्थिति इस समय कई राज्यों में बन चुकी है।

क्या जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार है?

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती चरम गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन भी एक अहम वजह है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ी हैं।

पहले जहां मई-जून में कुछ दिनों के लिए भीषण गर्मी पड़ती थी, अब लंबे समय तक लगातार तापमान ऊंचा बना रहता है। शहरों में कंक्रीट, कम हरियाली और “अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट” भी गर्मी को और बढ़ा रहे हैं।

कब मिलेगी राहत?

आईएमडी के अनुसार 28-29 मई के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तेज हवाएं, धूलभरी आंधी और हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।

राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना जताई गई है। हालांकि मध्य भारत और विदर्भ में गर्मी का असर कुछ और दिनों तक बना रह सकता है।

लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या है?

इस तरह की भीषण गर्मी सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट भी बन सकती है। लगातार तेज तापमान से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बिजली की मांग बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को लंबे समय तक सीधे धूप के संपर्क में न रखें।
Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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