Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 38 करोड़ की संपत्ति जब्त
- Authored by: अनुज मिश्रा
- Updated Dec 30, 2025, 07:14 PM IST
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 31 आबकारी अधिकारियों की करीब 38.21 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED की बड़ी कार्रवाई (फाइल फोटो)
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 31 आबकारी अधिकारियों की करीब 38.21 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।इनमें तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास (IAS) भी शामिल हैं।यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले से राज्य सरकार को 2,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आबकारी विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों ने मिलकर पूरे सिस्टम को अपने कब्जे में ले लिया और एक समानांतर अवैध व्यवस्था चला दी।
क्या-क्या संपत्ति जब्त हुई
ईडी ने जिन संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें 21.64 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति.. कुल 78 संपत्तियां, जिनमें लग्जरी बंगले, महंगे फ्लैट, कमर्शियल दुकानें और कृषि भूमि शामिल हैं।16.56 करोड़ रुपये की चल संपत्ति..197 मदों में फिक्स्ड डिपॉजिट, कई बैंक खातों की रकम, बीमा पॉलिसियां, शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।
कैसे चला शराब घोटाला
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी ने मिलकर एक “पार्ट-बी” योजना चलाई। इसके तहत सरकारी शराब दुकानों के जरिए बिना हिसाब-किताब की देशी शराब बेची गई।
इस अवैध शराब के लिए-डुप्लीकेट होलोग्राम इस्तेमाल किए गए। शराब की बोतलें और खेप सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रखी गई साथ ही शराब को सीधे डिस्टिलरी से दुकानों तक पहुंचाया गया, जिससे सरकारी गोदामों को बायपास किया गया।
अफसरों को मिलता था कमीशन
जांच में यह भी सामने आया कि आबकारी अधिकारियों को अपने-अपने इलाकों में पार्ट-बी शराब बिकवाने के बदले प्रति केस 140 रुपये का कमीशन दिया जाता था।ईडी के अनुसार, निरंजन दास ने अकेले 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई की और उन्हें हर महीने करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत मिलती थी। कुल मिलाकर 31 आबकारी अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) हासिल की।
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