शराब का बढ़ता सेवन यूरोप के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। हर साल करीब आठ लाख यूरोपीय लोगों की मौत शराब से जुड़ी बीमारियों और हादसों के कारण हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने यूरोप में शराब के बढ़ते और घातक प्रभावों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। WHO के अनुसार, यूरोप क्षेत्र में हर साल लगभग आठ लाख लोगों की मौत शराब के सेवन से जुड़ी बीमारियों और दुर्घटनाओं के कारण हो रही है। यह आंकड़ा न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है,बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी गहरे प्रभावों को उजागर करता है।
1,45,000 लोग शराब के बाद एक्सीडेंट से मरे
रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 1,45,000 लोगों की मौत शराब के नशे में लगी चोटों की वजह से हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि शराब सेवन केवल स्वास्थ्य जोखिम नहीं,बल्कि सामाजिक और मानसिक अस्थिरता का भी बड़ा कारण बन चुका है। शराब का गहरा संबंध आपसी हिंसा,हमले और घरेलू हिंसा से है। पूरे यूरोप में हिंसक चोटों से होने वाली मौतों के पीछे शराब एक प्रमुख वजह मानी जा रही है। वर्ष 2019 में करीब 26,500 मौतें आपसी हमलों के कारण हुईं,जिनमें से 40 प्रतिशत मामलों में शराब की भूमिका सामने आई।डब्ल्यूएचओ/यूरोप में अल्कोहल, गैर-कानूनी ड्रग्स और जेल हेल्थ की रीजनल एडवाइजर कैरिना फरेरा-बोर्गेस ने बताया कि शराब एक जहरीली चीज है जो न सिर्फ 7 तरह के कैंसर और दूसरी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां (एनसीडी) पैदा करती है, बल्कि यह फैसले लेने और खुद पर कंट्रोल करने की क्षमता को भी कम करती है, रिएक्शन टाइम को धीमा करती है, तालमेल कम करती है और रिस्क लेने की आदत को बढ़ावा देती है।
शराब से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में ये भी
रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में हृदय रोग, लिवर सिरोसिस, स्तन और आंत जैसे कैंसर, सड़क दुर्घटनाएं, हिंसा और आत्महत्या शामिल हैं। इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं और कामकाजी उम्र के लोगों पर पड़ रहा है, जिससे देशों की उत्पादकता घट रही है और स्वास्थ्य प्रणालियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
यूरोप में शराब की खपत सबसे ज्यादा
WHO के अनुसार, यूरोप उन क्षेत्रों में शामिल है जहां प्रति व्यक्ति शराब की खपत सबसे अधिक है। कई देशों में शराब सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके खतरनाक दुष्परिणाम अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। संगठन साफ तौर पर कहता है कि “शराब की कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है,” क्योंकि यह कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।
पूर्वी यूरोप में हालात सबसे बदतर
डेटा यह भी दिखाता है कि पूर्वी यूरोप में स्थिति सबसे गंभीर है। यहां शराब पीकर हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या पूरे यूरोप की तुलना में आधे से ज्यादा है,जबकि पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत से भी कम है।
सरकारों के लिए ये बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि शराब का असर केवल पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। घरेलू हिंसा,बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव,मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और सामाजिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां भी इससे गहराई से जुड़ी हैं। इसके अलावा,शराब से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च सरकारों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की अपील
WHO ने यूरोपीय देशों से शराब नियंत्रण को लेकर सख्त नीतियां अपनाने की अपील की है। सुझाए गए उपायों में शराब पर कर बढ़ाना,विज्ञापन और प्रायोजन पर रोक,बिक्री के समय और स्थान को सीमित करना और बोतलों पर स्पष्ट स्वास्थ्य चेतावनियां शामिल हैं। साथ ही,जन-जागरूकता अभियानों के जरिए यह संदेश देना जरूरी बताया गया है कि शराब का सेवन कम जोखिम नहीं, बल्कि सीधे तौर पर स्वास्थ्य जोखिम से जुड़ा है।
