भारत में सड़क हादसे अब किसी सामान्य दुर्घटना की श्रेणी में नहीं रहे, बल्कि एक राष्ट्रीय त्रासदी का रूप ले चुके हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में जो आंकड़े पेश किए, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि झकझोर देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि देश में हर साल होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में जितनी मौतें होती हैं, वह किसी युद्ध या कोविड महामारी से भी ज्यादा हैं।
भारत में हर वर्ष करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं और इनमें लगभग 1.8 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। देश के प्रमुख राजमार्गों- जैसे नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक रहती है।
भारत में सड़क हादसों में कुल 1.8 लाख लोगों की मौत हर साल होती है, जिनमें से 66 प्रतिशत युवा होते हैं। इन युवाओं की उम्र 18 से 34 साल के बीच होती है।
सड़क हादसों में हजारों की मौत सिर्फ इसलिए हो जा रही है, क्योंकि उन्हें सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। नितिन गडकरी की मानें तो अगर सड़क हादसे के घायलों को सही टाइम पर इलाज मिल जाए तो 50 हजार जिंदगियां बच सकती हैं।
गडकरी ने माना कि सड़क ढांचा बेहतर करने और कड़े नियम लागू करने के बाद भी सरकार दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लक्ष्य में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्यों को अत्याधुनिक एंबुलेंस उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है, ताकि दुर्घटना स्थल पर 10 मिनट के भीतर मदद पहुंच सके।
भारत में लगभग 66.71 लाख किमी का सड़क नेटवर्क है, जो दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है। भारत में यात्री और माल ढुलाई, दोनों में सड़क परिवहन ज़्यादा आगे है, जो देश के कुल यातायात (यात्री और माल) का लगभग 85% संभालता है। ऐसे में सड़क हादसों की ये संख्या काफी चिंताजनक है।
WHO की रिपोर्ट के अनुसार हर साल सड़क हादसों की वजह से लगभग 1.19 मिलियन लोगों की मौत हो जाती हैं। 5-29 साल की उम्र के बच्चों और युवाओं के लिए सड़क दुर्घटनाएं मौत का सबसे बड़ा कारण हैं। दुनिया भर में सड़कों पर होने वाली 92% मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं, जबकि इन देशों में दुनिया के लगभग 60% वाहन हैं।