अमेरिका शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के बिजनेस से संबंधित एक रिपोर्ट पेश की थी जिसके बाद उन्हें बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। अडानी ने नैतिकता के आधार पर एफपीओ में निवेश रकम को निवेशकों को वापस करने का फैसला किया। इसके साथ ही .यह मामला संसद और उसके गलियारों में भी गूंज रहा है। इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट में एम एल शर्मा और विशाल तिवारी ने दो पीआईएल लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इन पीआईएल पर सुनवाई की मंजूरी भी दे दी है। यहां हम बताएंगे कि दोनों पीआईएल में क्या है।
सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर
वकील विशाल तिवारी पीआईएल में जिक्र है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट की वजह से भारत की छवि धुमिल हुई है और इसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। वहीं एम एल शर्मा की अपील में जिक्र किया है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से बाजार पर प्रभाव पड़ा। यही नहीं हिंडनबर्ग सेबी को साक्ष्य पेश करने में भी नाकाम रहा है। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अडानी की कंपनी ने अकाउंटिंग में फ्रॉड किया, स्टॉक के साथ हेराफेरी की। इस रिपोर्ट के बाद राजनीतिक तौर पर भी हलचल तेज है।
सरकार का लेना देना नहीं
विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि इसमें पीएम और भारत सरकार का अडानी के साथ कनेक्शन है। इस विषय पर कांग्रेस के साथ साथ दूसरे दल सदन में हर एक दिन स्थगन प्रस्ताव ला रहे हैं। इसके साथ ही विपक्ष ने जेपीसी की मांग की थी हालांकि सरकार से स्पष्ट कर दिया है कि जेपीसी जांच किसी शख्स के खिलाफ नहीं बैठायी जा सकती है। सरकार का कहना है कि यह औद्योगिक घराने से जुड़ा मामला है इसमें सरकार से कोई लेना देना नहीं है।
