Ahmedabad Plane Crash : अहमदाबाद विमान दुर्घटना में पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की मौत के एक साल बाद उनके पुत्र ऋषभ रूपाणी ने परिवार की ओर से सभी मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 12 जून 2025 की दुर्घटना में उनके पिता सहित 260 लोगों की जान गई थी और यह क्षति कभी भुलाई नहीं जा सकती। ऋषभ रूपाणी ने बताया कि उनके पिता के विचारों, मूल्यों और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से परिवार ने 'श्री विजय रूपाणी मेमोरियल फाउंडेशन' की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्य करेगा।
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'दवाइयां और आवश्यक जांच उपलब्ध कराएंगे'
उन्होंने बताया कि फाउंडेशन की ओर से 13 जून को राजकोट में किडनी रोगों की रोकथाम और जागरूकता पर एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा, जिसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भी सहयोगी रहेगा। इसके अलावा 14 जून को राजकोट में सर्वरोग निदान मेडिकल कैंप का आयोजन होगा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर नि:शुल्क परामर्श, दवाइयां और आवश्यक जांच उपलब्ध कराएंगे। इस दौरान ऋषभ रूपाणी ने विमान हादसे की जांच पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत सरकार, एएआईबी (AAIB), डीजीसीए (DGCA) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जांच प्रक्रिया पर परिवार का पूरा विश्वास है। उन्होंने सभी पीड़ित परिवारों से भी जांच एजेंसियों पर भरोसा बनाए रखने की अपील की।
यह एक जटिल और बड़े स्तर की दुर्घटना थी- ऋषभ रूपाणी
एयर इंडिया और परिवार के बीच कथित ईमेल विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह एक निजी मामला है, जो परिवार और एयर इंडिया के बीच का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित ईमेल केवल कानूनी कार्रवाई से जुड़े वेवर को लेकर था और एयर इंडिया इस पर अपना पक्ष पहले ही सार्वजनिक कर चुकी है। विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट में हो रही देरी को लेकर ऋषभ रूपाणी ने कहा कि यह एक जटिल और बड़े स्तर की दुर्घटना थी। ऐसे मामलों में ब्लैक बॉक्स डेटा, तकनीकी पहलुओं और विभिन्न संभावित कारणों की गहन जांच की जाती है, जिसके लिए समय लगना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरी और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ऋषभ रूपाणी ने कहा कि परिवार आज भी इस त्रासदी के दर्द को महसूस करता है, लेकिन उनके पिता के सेवा और जनकल्याण के विचारों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
