जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग CJP कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह ललेर की अदालत इस मामले में कल फैसला सुनाएगी।
SC/ST और POCSO की FIR की जानकारी पर बंद कमरे में सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दो अलग-अलग FIR दर्ज हैं। एक FIR SC/ST एक्ट के तहत है, जबकि दूसरी पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज की गई है।इसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका पर इन-कैमरा यानी बंद कमरे में सुनवाई करने का फैसला लिया।SC/ST एक्ट की FIR में हुई गिरफ्तारी
कोर्ट को बताया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी SC/ST एक्ट वाली FIR में हुई है, POCSO मामले में नहीं। भारद्वाज फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज की हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका के जरिए उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।बुलंदशहर से हुई थी स्वतंत्र की गिरफ्तारी
स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई CJP की ओर से संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग किए जाने के कुछ घंटे बाद हुई थी। स्वतंत्र भारद्वाज उस समय चर्चा में आया था जब एक वीडियो पॉडकास्ट में नाबालिग CJP प्रदर्शनकारी के पिता से कथित मारपीट को लेकर उनके दावे का वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में उन्होंने अपने राजनीतिक संपर्क होने का भी दावा किया था।पुलिस ने बाद में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ीं
दिल्ली पुलिस ने नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता से कथित मारपीट के मामले की FIR में बाद में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं जोड़ी थीं। इसके अलावा उनके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।बचाव पक्ष का दावा- शिकायतकर्ता ने पहले भारद्वाज पर हमला किया
स्वतंत्र भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने कोर्ट में दावा किया कि CJP प्रदर्शन के दौरान शिकायतकर्ता ने ही भारद्वाज पर हमला किया था। वकील ने कहा कि इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद है और वीडियो में भारद्वाज के गिरने और पुलिस द्वारा उन्हें बचाने की बात दिखाई देती है।
कोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो को चलाकर देखा, जिसमें CJP प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज पर कथित हमला दिखाई देता है। वीडियो देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस वीडियो के आधार पर अलग से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
गिरफ्तारी की टाइमलाइन पर बचाव पक्ष की दलील
भारद्वाज के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके खिलाफ 23 जून को FIR दर्ज हुई थी। 27 जून को पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस दिया और वह 29 जून को पूछताछ के लिए पेश हुए थे। वकील के मुताबिक इसके बाद उन्हें जाने दिया गया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि इसके बाद कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद 4 सितंबर को भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया। वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद POCSO की नई FIR दर्ज की गई।
SC/ST एक्ट लगाने पर कोर्ट का सवाल
पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या घटना के समय स्वतंत्र भारद्वाज ने जातिसूचक गाली दी थी? इस पर दिल्ली पुलिस ने बताया कि शुरुआत में दर्ज शिकायत में जातिसूचक गाली का कोई जिक्र नहीं था। बाद में दोबारा बयान दर्ज होने पर जातिसूचक गाली का आरोप सामने आया और इसी आधार पर SC/ST एक्ट की धाराएं लगाई गईं।
शिकायतकर्ता पक्ष का दावा- वीडियो में हमले की स्वीकारोक्ति
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील स्वाति खन्ना ने दावा किया कि भारद्वाज ने शिकायतकर्ता के खिलाफ जातिसूचक गाली का इस्तेमाल किया था। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर भारद्वाज का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह खुद शिकायतकर्ता पर हमला करने की बात स्वीकार करते दिखाई देते हैं।
शिकायतकर्ता पक्ष- जांच अभी शुरुआती दौर में
शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुल चार FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें SC/ST एक्ट और POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले भी शामिल हैं।
एक तरफ बचाव पक्ष ने वायरल वीडियो दिखाकर दावा किया कि शिकायतकर्ता ने पहले भारद्वाज पर हमला किया, वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने दूसरे वीडियो को भारद्वाज की ओर से हमले की स्वीकारोक्ति बताया। यानी जमानत की सुनवाई में दोनों पक्षों ने सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो को अपनी-अपनी दलील का आधार बनाया।
