Karnataka Cabinet Expansion: कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जारी नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को पार्टी के नाराज विधायकों से मुलाकात की।
किस-किस से मिले CM शिवकुमार
शिवकुमार और सुरजेवाला ने कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एम. कृष्णप्पा और प्रिया कृष्णा से बेंगलुरु के विजयनगर स्थित आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, शिवकुमार ने इस मुलाकात 'रणनीतिक चर्चा' का नाम दिया।
शिवकुमार ने कहा, ''हमें सभी का ध्यान रखना है, जिम्मेदारियां साझा करनी हैं और आगे की रणनीति पर काम करना है। इसीलिए हम बातचीत कर रहे हैं। किसी नाराजगी का सवाल ही नहीं उठता। नाराजगी कहां है? सबकुछ ठीक है और इसमें कोई समस्या नहीं है। ये सभी वरिष्ठ और निष्ठावान नेता हैं। हम यही बताना चाहते थे।
'परिवार में मतभेद होना स्वभाविक...'
सुरजेवाला ने कहा कि कृष्णप्पा जी और प्रिया कृष्णा जी... हम सब एक ही परिवार का हिस्सा हैं। एक परिवार में वास्तविक चिंताएं भी होती हैं, कभी-कभी शिकायत भी होगी और कई बार अनबन भी होंगे। ऐसे में परिवार के सदस्यों से बात करना हमारा फर्ज है।
सुरजेवाला ने कहा कि एम. कृष्णप्पा कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। इस दौरान, सुरजेवाला ने स्वीकार किया कि कृष्णप्पा को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी, लेकिन एक वरिष्ठ नेता होने के नाते उनसे मिलना और उनकी बात सुनना हमारी जिम्मेदारी है।
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उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान विजयनगर और गोविंदराज नगर विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं, शिकायतों और उनकी गंभीर चिंताओं को ध्यान से सुना।
सनद रहे कि कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 सदस्य हो सकते हैं। सोमवार को हुए विस्तार के बाद भी एक पद खाली है। सूत्रों के मुताबिक, सुरजेवाला की सिद्दारमैया से मुलाकात की भी संभावना है। पार्टी हलकों में इस बात की काफी चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री इस बात से नाराज हैं कि कैबिनेट विस्तार के दौरान आलाकमान ने उनकी सिफारिशों को नहीं माना। जानकारी के मुताबिक, ब्यादगी के विधायक बसवराज शिवन्ननवर (जो कुरुबा समुदाय से हैं) को कैबिनेट में शामिल न किए जाने से सिद्दारमैया नाराज हैं, जबकि उसी समुदाय की विधान परिषद सदस्य गायत्री शांतेगौड़ा का नाम आलाकमान की ओर से भेजी गई सूची में शामिल था पर उनका शपथग्रहण आखिरी समय पर रद्द कर दिया गया।
