एक सप्ताह से भी ज्यादा समय से इंडिगो में जारी व्यवधान के बीच ये मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को बेहद गंभीर करार दिया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वह इस स्थिति से अवगत है, हालांकि सुप्रीम अदालत ने इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया। वहीं, यात्रियों की परेशानियों को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सहानुभूतिपूर्वक सुना और 10 दिसंबर को इस मसले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस बीच, इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स, सीओओ इसिड्रे पोरक्वेरस ने डीजीसीए के कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल कर दिया है।वहीं, सूत्रों ने यह भी बताया कि डीजीसीए की समिति बुधवार को इंडिगो के सीईओ व सीओओ को तलब कर सकती है।
10 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई
वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट में इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका में प्रभावित यात्रियों को सहायता और धन वापसी प्रदान करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कई लोग फंसे हुए हैं। हवाई अड्डों पर जमीनी हालात अमानवीय हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत हवाई अड्डों पर फंसे लोगों के लिए इंडिगो और जमीनी सहायक कर्मचारियों को आदेश देगी। पैसे वापस करने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। फिलहाल मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने मामले की सुनवाई 10 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दी।
सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
इंडिगो की फ्लाइट बड़ी संख्या में रद्द होने के चलते लाखों यात्रियों को हुई परेशानी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग हुई। लेकिन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई से इनकार किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI) ने कहा कि ये बात सही है कि लाखों यात्री परेशान हुए हैं, बहुत लोगों के जरूरी काम छूट गए, लेकिन सरकार इस मामले को देख रही है तो उन्हें संभालने दें। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने फ्लाइट कैंसिल होने के चलते कई यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करने की बात भी मानी।
कहा- हम एयरलाइन नहीं चला सकते
याचिकाकर्ता वकील नरेंद्र मिश्रा ने याचिका दाखिल करके सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी, उन्होंने कहा कि 2500 से ज्यादा फ्लाइट रद्द हुई, देश भर के सारे एयरपोर्ट प्रभावित हुए, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम एयरलाइन नहीं चला सकते। भारत सरकार ने पहले ही इस मामले का संज्ञान ले लिया है। समय पर कार्रवाई की गई है।
डीजीसीए की समिति इंडिगो के सीईओ व सीओओ को कर सकती है तलब
इस बीच सामने आया है कि डीजीसीए की समिति इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) इसिड्रे पोरक्वेरस को बुधवार को तलब कर सकती है।
बता दें कि संयुक्त महानिदेशक संजय ब्राह्मणे, उप महानिदेशक अमित गुप्ता, वरिष्ठ उड़ान परिचालन निरीक्षक (एफओआई) कपिल मांगलिक और एफओआई लोकेश रामपाल वाली चार सदस्यीय समिति को इंडिगो की उड़ानों के परिचालन में व्यापक व्यवधानों के मूल कारणों का पता लगाने का काम सौंपा गया है। यह समिति पायलटों के ड्यूटी और ब्रेक नियमों को लागू करने की एयरलाइन की तैयारी, स्टाफ योजना और बदलती रोस्टर प्रणाली की समीक्षा कर रही है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इंडिगो ने दिया नोटिस का जवाब
संकटों का सामना कर रही इंडिगो ने विमानन नियामक डीजीसीए को उसके कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया। डीजीसीए ने बयान में कहा कि वह नोटिस पर मिले जवाब की पड़ताल कर रहा है, और जो भी प्रवर्तन कदम उचित समझा जाएगा, वह कार्रवाई समय आने पर की जाएगी।अपने जवाब में एयरलाइन ने कहा कि उसे उड़ानें रद्द होने के बाद ग्राहकों को हुई परेशानी और कठिनाइयों के लिए बहुत अफसोस है। इसके लिए उसने खेद भी जताया है। इंडिगो ने डीजीसीए को भेजे गए जवाब में बताया कि मौजूदा संकट किसी एक गलती के कारण नहीं, बल्कि कई छोटी-बड़ी वजहों के एक साथ जुड़ने से उत्पन्न हुआ है। सर्दियों के मौसम में उड़ानों के शेड्यूल बदले गए थे, वहीं खराब मौसम ने भी संचालन को प्रभावित किया। इन परिस्थितियों के बीच एविएशन सिस्टम में अचानक बढ़ी भीड़भाड़ ने चुनौतियों को और बढ़ा दिया।
नियामक ने शनिवार को इंडिगो के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स और जवाबदेही प्रबंधक इसिड्रो पोर्केरास को कारण बताओ नोटिस जारी करके उड़ानों में पैदा हुए भारी गतिरोध पर 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा था। बाद में एयरलाइन की तरफ से और समय मांगे जाने के बाद नोटिस का जवाब देने की समयसीमा को सोमवार शाम छह बजे तक बढ़ा दिया गया था।
