ठप पड़ा है दिल्ली महिला आयोग, 2 साल से आयोग को अध्यक्ष का इंतजार, राजद सांसद ने दिल्ली HC से की ये मांग
- Reported by: गौरव श्रीवास्तव
- Updated Jan 30, 2026, 10:54 AM IST
राजद सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर याचिका में बताया गया है कि दिल्ली महिला आयोग का कार्यालय लंबे समय से आम लोगों के लिए खुला नहीं रहता। कामकाजी घंटों में भी वहां कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं रहते, जिससे पीड़ित महिलाओं की शिकायतें दर्ज नहीं हो पा रही हैं।
दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष पद रिक्त है।
Delhi Commission for Women : कभी बेहद सक्रिय दिखने वाले दिल्ली महिला आयोग में जनवरी 2024 से कोई अध्यक्ष ही नहीं है। महिला आयोग के लंबे समय से निष्क्रिय होने की शिकायत करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका राजद सांसद सुधाकर सिंह ने दायर की है और उनकी ओर से अदालत में अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत पेश हो रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए बनी यह संवैधानिक संस्था फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
कार्यालय बंद और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था ठप
याचिका में बताया गया है कि दिल्ली महिला आयोग का कार्यालय लंबे समय से आम लोगों के लिए खुला नहीं रहता। कामकाजी घंटों में भी वहां कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं रहते, जिससे पीड़ित महिलाओं की शिकायतें दर्ज नहीं हो पा रही हैं। न तो कोई हेल्पडेस्क काम कर रही है और न ही शिकायतों के निपटारे की कोई प्रक्रिया सक्रिय है।
जनवरी 2024 से अध्यक्ष पद खाली
याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष पद जनवरी 2024 से खाली पड़ा है। नेतृत्व न होने के कारण संस्था की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इससे आयोग की निगरानी, निर्णय प्रक्रिया और जवाबदेही व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।
काउंसलिंग और संकट सहायता सेवाएं भी बंद
याचिका के अनुसार, आयोग के तहत चलने वाली पारिवारिक काउंसलिंग इकाइयां, रेप संकट सहायता केंद्र और अन्य आपात सेवाएं भी काम नहीं कर रही हैं। इससे घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य गंभीर मामलों में पीड़ित महिलाओं को जरूरी मदद नहीं मिल पा रही है।
संविधान के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में कहा गया है कि आयोग की निष्क्रियता संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है, जो समानता, महिला सशक्तिकरण और जीवन के अधिकार से जुड़े हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब दिल्ली जैसे शहर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, ऐसे समय में आयोग का निष्क्रिय रहना बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
हाई कोर्ट से समयबद्ध निर्देश की मांग
याचिका के जरिए दिल्ली हाई कोर्ट से मांग की गई है कि वह सरकार को निर्देश दे कि दिल्ली महिला आयोग का कामकाज तुरंत बहाल किया जाए। इसके साथ ही आयोग में पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति हो, सभी सेवाएं दोबारा शुरू हों और अध्यक्ष पद को तय समय सीमा में भरा जाए। साथ ही अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
याचिकाकर्ता के वकील ने कही ये बड़ी बात
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनी कोई भी वैधानिक संस्था केवल कागजों पर नहीं चल सकती। अगर आयोग निष्क्रिय रहेगा तो इससे महिलाओं को न्याय मिलने की प्रक्रिया कमजोर होगी और संविधान की भावना को ठेस पहुंचेगी।
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