भारत को 114 राफेल जेट मिलेंगे, रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में DAC ने 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को दी मंजूरी
- Authored by: Shivani Mishra
- Updated Feb 12, 2026, 05:20 PM IST
DAC News: इस बड़े फैसले से तीनों सेनाओं और भारतीय तटरक्षक बल की युद्ध क्षमता और ऑपरेशनल तैयारियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को की मंजूरी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 12 फरवरी को करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को Acceptance of Necessity (AoN) की मंजूरी दे दी। इस बड़े फैसले से तीनों सेनाओं और भारतीय तटरक्षक बल की युद्ध क्षमता और ऑपरेशनल तैयारियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
वायुसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA–राफेल) की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिनमें से अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके अलावा कॉम्बैट मिसाइलों की खरीद से लंबी दूरी तक सटीक हमले की क्षमता बढ़ेगी, जबकि एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) प्रणाली के जरिए लगातार निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और सैन्य संचार को मजबूती मिलेगी।
थलसेना के लिए ‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस की खरीद को स्वीकृति दी गई है, जो दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों की प्रगति रोकने में अहम भूमिका निभाएंगी। साथ ही T-72 टैंकों, BMP-II और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के ओवरहॉल से इन प्लेटफॉर्म्स की सेवा आयु और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी।
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा
नौसेना के लिए 4 मेगावाट मरीन गैस टरबाइन आधारित पावर जनरेटर को ‘मेक-1’ श्रेणी के तहत मंजूरी मिली है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान की स्वीकृति से पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री निगरानी और स्ट्राइक क्षमता मजबूत होगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ और मेक इन इंडिया पहल को भी नई गति
वहीं, भारतीय तटरक्षक बल के डॉर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सिस्टम की खरीद से समुद्री निगरानी और खोज-बचाव अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि यह बड़ा रक्षा पैकेज देश की सुरक्षा के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ और मेक इन इंडिया पहल को भी नई गति देगा।
वायुसेना को क्या मिलेगा?
MRFA (राफेल) लड़ाकू विमान: नई पीढ़ी के मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे, जिनमें से ज्यादातर का निर्माण भारत में होगा। इससे वायुसेना की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ेगी।
कॉम्बैट मिसाइलें: दुश्मन के ठिकानों पर दूर से सटीक वार करने की ताकत मिलेगी।
AS-HAPS सिस्टम: यह हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म लगातार निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और सैन्य संचार में मदद करेगा।
थलसेना के लिए अहम कदम
‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस: दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों की रफ्तार रोकने में मददगार।
T-72 टैंक, BMP-II और अन्य वाहनों का ओवरहॉल: पुराने प्लेटफॉर्म की उम्र और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी।
नौसेना की ताकत बढ़ेगी
4 मेगावाट मरीन गैस टरबाइन पावर जनरेटर: ‘मेक-1’ श्रेणी के तहत स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा।
P-8I समुद्री टोही विमान: पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री निगरानी और स्ट्राइक क्षमता मजबूत होगी।
तटरक्षक बल को भी लाभ
डॉर्नियर विमान के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सिस्टम: समुद्री निगरानी और सर्च ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी होंगे।
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