गुजरात में हालिया सैन्य गतिविधियों के बाद अब राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना की बढ़ी हुई मौजूदगी ने रणनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। दक्षिणी कमान के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने पोखरण पहुंचकर ‘एक्सरसाइज रुद्र शक्ति’ का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। यह अभ्यास सामान्य सैन्य ड्रिल से कहीं आगे माना जा रहा है, क्योंकि इसमें लाइव फायरिंग के साथ सेना की संयुक्त युद्ध क्षमताओं को परखा गया।
त्याधुनिक हेलिकॉप्टर, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का परीक्षण
पोखरण की रेगिस्तानी परिस्थितियों में हुए इस अभ्यास के दौरान थलसेना की विभिन्न इकाइयों ने एक साथ समन्वित ऑपरेशन्स का प्रदर्शन किया। मैकेनाइज़्ड फोर्स, आर्टिलरी, एयर डिफेंस यूनिट्स, आर्मी एविएशन के अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के जरिए यह दिखाया गया कि भारतीय सेना बदलते युद्धक्षेत्र में कितनी तेज़ी और सटीकता से कार्रवाई करने में सक्षम है। यह अभ्यास पहले हुए ‘एक्सरसाइज अखंड प्रहार’ की अगली कड़ी बताया जा रहा है, जिसमें रेगिस्तानी सेक्टर में नई ऑपरेशनल अवधारणाओं को परखा गया था।
अभ्यास के दौरान सेना प्रमुख ने मैदान में मौजूद जवानों से बातचीत की और उनके प्रशिक्षण स्तर, पेशेवर दक्षता और ऑपरेशनल तैयारियों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सेना किसी भी जटिल मिशन को कम समय में, उच्च समन्वय और पूरी सटीकता के साथ अंजाम देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सेना का बहु-आयामी युद्ध अभ्यास
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब सेना लगातार उच्च तीव्रता वाले और बहु-आयामी युद्ध अभ्यास कर रही है, वह भी विभिन्न रक्षा एजेंसियों के बीच गहरे समन्वय के साथ, तो क्या यह केवल नियमित अभ्यास है या फिर किसी बड़े मिशन की तैयारी का संकेत? सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभ्यास भविष्य के युद्ध परिदृश्यों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं, खासकर तब जब पश्चिमी सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं।
पोखरण में हुई इस व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य गतिविधि की गूंज सीमा पार तक सुनाई दे रही है। माना जा रहा है कि भारतीय सेना की इस आक्रामक और पूरी तरह एकीकृत युद्ध क्षमता ने पाकिस्तान में रणनीतिक चिंता बढ़ा दी है। हालांकि सेना की ओर से किसी संभावित ऑपरेशन को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन जिस तरह से मिशन-रेडीनेस, तकनीकी सशक्तिकरण और तेज़ प्रतिक्रिया क्षमता पर ज़ोर दिया जा रहा है, उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ जैसी अटकलों को जन्म दे दिया है।
फिलहाल भारतीय सेना इसे अपनी निरंतर परिवर्तनशील और भविष्य-तैयार रणनीति का हिस्सा बता रही है, लेकिन पोखरण के रेगिस्तान में गूंजती गोलियों और उड़ते युद्धक हेलिकॉप्टरों के बीच एक सवाल अब भी कायम है - क्या भारत किसी बड़े और निर्णायक कदम की ओर बढ़ रहा है?
