पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसी ने हत्या की सुपारी देने के आरोप में दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सागर सोनकर और साहिब सोनकर के रूप में हुई है, जो दोनों सगे भाई हैं और मृतक चंद्रनाथ रथ के साथ काम करते थे।
CBI जांच में सामने आया है कि सागर सोनकर नौकरी के दौरान एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के स्थानीय कार्यालय से नियमित रूप से लैंडलाइन के जरिए संपर्क में था। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह किस व्यक्ति के संपर्क में था और उसकी भूमिका क्या थी।
2025 से चल रही थी हत्या की साजिश
जांच एजेंसी के मुताबिक,चंद्रनाथ रथ की हत्या की साजिश दिसंबर 2025 से रची जा रही थी। हालांकि, किन्हीं कारणों से योजना बार-बार टलती रही। जांच के दौरान CBI को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे सागर सोनकर के कथित तौर पर शूटरों से संबंध सामने आए हैं। एजेंसी का आरोप है कि सागर ने ही शूटरों को हत्या की सुपारी दी और वारदात को अंजाम देने के लिए उन्हें पैसे भी उपलब्ध कराए।प्रतिद्वंद्वी दल से संबंधों की जांच
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच में सागर सोनकर और प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के स्थानीय कार्यालय के बीच कई बार बातचीत होने का पता चला है। CBI यह भी जांच कर रही है कि वर्ष 2020 तक सागर उसी प्रतिद्वंद्वी दल के एक विधायक के साथ काम करता था और बाद में भाजपा में शामिल हो गया था।
6 मई को हुई थी हत्या
बता दें कि राज्य में हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक और उनके करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की 6 मई को उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में जेसोर रोड पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने के दो दिन बाद हुई थी। रथ को भवानीपुर क्षेत्र में सुवेंदु अधिकारी के चुनाव अभियान का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था।
अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार
CBI अब तक इस मामले में छह शूटरों और तीन बिचौलियों समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी के मुताबिक, एक आरोपी अभी भी फरार है। पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर यह मामला राज्य पुलिस से CBI को सौंपा गया था। जांच के लिए CBI ने दिल्ली से एक डीआईजी की अगुवाई में सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है।
